ओडिशा से गांजा अब जंगल या ट्रकों के भरोसे नहीं, बल्कि यात्री ट्रेनों के जरिए छत्तीसगढ़ पहुंचाया जा रहा है। कबीरधाम पुलिस की ताजा कार्रवाई ने नशे की तस्करी के उस रेल नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो सोनपुर (ओडिशा) से रायपुर तक ट्रेन से और फिर किराए की टैक्सी के जरिए उत्तरप्रदेश तक गांजा पहुंचा रहा था। चिल्फी थाने की पुलिस ने इसी रूट पर काम कर रहे 3 अंतरराज्यीय तस्करों को 15.48 किलो गांजा के साथ गिरफ्तार किया है। जब्त गांजा की कीमत 7.75 लाख रुपए आंकी गई है। पकड़े गए आरोपियों में इमाम पिता वाहिद खान (40) निवासी सिचौली पुरवा, जिला हमीरपुर (उप्र), महताब पिता इकबाल अहमद (25) निवासी हिमौली, जिला हमीरपुर (उप्र) और मो. रासिक पिता मो. रजा उर्फ राजू (29) निवासी अशोक विहार फेस- 3 शीतला कॉलोनी, गुड़गांव (हरियाणा), हाल पता सुभाष नगर मौदहापारा (रायपुर) शामिल है। ट्रेन बनी तस्करों की पहली पसंद
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी महताब अहमद और मो. रासिक ओडिशा के सोनपुर क्षेत्र से गांजा खरीदते थे। वहां से वे इसे छोटे पैकेटों में बैग में भरकर यात्री ट्रेन से रायपुर लाते थे। तस्करी के लिए ट्रेन इसलिए चुनी गई क्योंकि लगेज की सघन जांच नहीं होती है। यात्रियों की भीड़ में पहचान छिप जाती है। रायपुर में ट्रेन से उतरते ही बदल गया मोड
रायपुर पहुंचते ही कहानी का दूसरा हिस्सा शुरू होता है। यहां टैक्सी चालक इमाम खान पहले से अलर्ट रहता है। ट्रेन से उतरते ही गांजा उसके हवाले कर दिया जाता है। इसके बाद परमिट वाहन से गांजा को उत्तरप्रदेश के हमीरपुर ले जाने निकलते हैं। यह पूरी योजना इतनी प्रोफेशनल है कि हर व्यक्ति सिर्फ अपनी भूमिका जानता है।


