ओरण प्रेमियों के साथ जैसलमेर राइजिंग यूथ ने खेली होली:300KM दूर गिरी सुमेल पहुंचे युवा, 725 किमी की पदयात्रा को दिया समर्थन

पश्चिमी राजस्थान की सांस्कृतिक अस्मिता और पर्यावरण के प्रतीक ‘ओरण’ को बचाने की गूँज अब गांवों की चौपालों से निकलकर रणभूमियों तक पहुँच गई है। “ओरण बचाओ, जैसान बचाओ” के जनसंदेश के साथ जैसलमेर राइजिंग यूथ के युवाओं ने गिरी सुमेल युद्धस्थली (जैतारण, पाली) पहुँचकर ओरण वासियों के साथ होली स्नेह मिलन कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान रंगों के उत्सव के साथ-साथ जैसलमेर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने का सामूहिक संकल्प लिया गया। विरासत से जुड़ा है ओरण का मुद्दा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि ओरण क्षेत्र की वर्तमान परिस्थितियां चिंताजनक हैं। यह केवल एक भौगोलिक क्षेत्र या कुछ गांवों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह जैसलमेर की पहचान, जीवटता और पूर्वजों की विरासत से जुड़ा विषय है। युवाओं ने स्पष्ट किया कि यदि आज हम अपनी चराई भूमि और पवित्र वनों को नहीं बचा पाए, तो आने वाली पीढ़ियों को हम एक उजाड़ रेगिस्तान सौंपेंगे। ओरण संघर्ष समिति के साथियों के साथ गुलाल लगाकर आपसी भाईचारे और एकता का संदेश दिया गया। लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भरा उत्साह स्नेह मिलन के दौरान स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पारम्परिक लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को उत्साह से भर दिया। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि विकास की अंधी दौड़ में ओरण की बलि नहीं चढ़ने दी जाएगी। जैसलमेर राइजिंग यूथ ने घोषणा की कि वे भविष्य में भी ओरण के संरक्षण के लिए व्यापक जनजागरण अभियान जारी रखेंगे और हर गांव-ढाणी तक इस संदेश को पहुँचाएंगे। जयपुर की ओर बढ़ रहे कदम: 725 किमी की पदयात्रा गौरतलब है कि जैसलमेर में ओरण को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने और इसे अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए आंदोलन तेज हो गया है। पर्यावरण प्रेमी सुमेर सिंह सांवता और भोपाल सिंह झालोड़ा के नेतृत्व में ग्रामीण और युवा जैसलमेर से जयपुर तक की 725 किलोमीटर लंबी पदयात्रा पर हैं। स्नेह मिलन कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं ने इस पदयात्रा को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि जब तक सरकार ओरण को संरक्षण प्रदान नहीं करती, यह संघर्ष जारी रहेगा।

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