झुंझुनूं जिले में ट्रक संचालकों का गुस्सा फूट पड़ा है। जिले में व्याप्त अवैध खनन, धड़ल्ले से दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों और प्रशासनिक वसूली के खिलाफ ‘झुंझुनूं ट्रक यूनियन’ ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में एकत्रित हुए ट्रक मालिकों ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। यूनियन का आरोप है कि परिवहन विभाग, खनिज विभाग और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, जबकि नियम मानने वाले वाहन मालिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ईमानदारी पड़ रही भारी, मिलीभगत से चल रहा खेल प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे यूनियन के सदस्य प्रवीण और अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि यूनियन से जुड़े अधिकांश मालिकों ने अपनी गाड़ियों की बढ़ी हुई बॉडी कटवा दी है और नियमनुसार ‘अंडरलोड’ गाड़ियां चला रहे हैं। लेकिन प्रशासन और रॉयल्टी ठेकेदारों की शह पर कुछ लोग अभी भी ओवरलोड और अवैध खनन का काम कर रहे हैं। ज्ञापन में लगाए गए आरोप भेदभावपूर्ण कार्रवाई: यूनियन का कहना है कि उनकी गाड़ियाँ अंडरलोड होने के बावजूद जानबूझकर चालान किए जा रहे हैं, जबकि मिलीभगत वाले ओवरलोड वाहन बेखौफ निकल रहे हैं। भारी जुर्माना: शिकायत के नाम पर एक गाड़ी पर 1.50 लाख से 2 लाख रुपये तक का भारी भरकम चालान करवाकर मालिकों को प्रताड़ित किया जा रहा है। जब भी शिकायत होती है, प्रशासन केवल कुछ घंटों की ‘फॉर्मेलिटी’ करता है। छापेमारी से पहले ही अवैध संचालकों को सूचना दे दी जाती है। परिवारों पर मंडराया संकट ट्रक मालिकों देवा जाट, करतार, विजेन्द्र, अमित सहित अन्य ने बताया कि भेदभाव और भ्रष्टाचार के कारण पिछले 3-4 महीनों से उनकी गाड़ियाँ खड़ी हैं। इससे करीब 150 परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। रात के अंधेरे में रॉयल्टी ठेकेदारों और प्रशासन की मिलीभगत से ओवरलोड वाहन गाँवों के रास्तों से होकर झुंझुनूं मोड़ा पहाड़ और अन्य क्षेत्रों में पहुँच रहे हैं, जिससे बाजार की दरों में भारी अंतर आ रहा है। ट्रक यूनियन की प्रमुख मांगें यूनियन ने प्रशासन के सामने मांगें रखी हैं और चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे जिले में ‘चक्काजाम’ किया जाएगा। जिले भर में अवैध खनन और ओवरलोडिंग को पूरी तरह बंद किया जाए। अवैध नाके: सड़कों पर चल रहे अवैध रॉयल्टी नाकों को तुरंत हटाया जाए। समान नियम: सभी गाड़ियों की बढ़ी हुई बॉडी हटवाई जाए ताकि प्रतिस्पर्धा समान रहे। टोल पर सख्ती: टोल टैक्स संचालकों को ओवरलोड वाहनों को रोकने के लिए पाबंद किया जाए। भ्रष्टाचार पर लगाम: स्थानीय प्रशासन और विभागों द्वारा की जा रही अवैध वसूली बंद हो। चक्काजाम की चेतावनी ज्ञापन सौंपने के दौरान यूनियन ने स्पष्ट किया कि अब तक स्थानीय विधायक और उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन नतीजा शून्य रहा। यदि इस बार ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो सभी गाड़ी मालिक मजबूरन अपने वाहनों को खड़ा कर हड़ताल पर चले जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह जिला प्रशासन की होगी।


