कचरे की लंबी लड़ाई:2004 में याचिका दायर ​अमल में 21 साल लग गए

अगस्त 2004 भोपाल निवासी आलोक प्रताप सिंह ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर यूनियन कार्बाइड परिसर में पड़े जहरीले कचरे को हटाने की गुहार लगाई। साथ ही पर्यावरण को हुए नुकसान के निवारण की मांग भी की। मार्च 2005 उच्च न्यायालय ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निपटान के संबंध में एक टास्क फोर्स समिति का गठन किया। इस समिति को कचरे के सुरक्षित निपटान करने को लेकर अपनी सिफारिशें देनी थी। अप्रैल 2005 केंद्रीय रसायन और पेट्रोकेमिकल्स मंत्रालय ने एक आवेदन दायर कर हाईकोर्ट से कहा कि जहरीला कचरा खर्च हटाने के आने वाला पूरा खर्च इसके लिए उत्तरदायी कंपनी डाउ केमिकल्स, यूसीआईएल से ही वसूला जाए। जून 2005 उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार गैस राहत विभाग ने कचरे को पैक करने और भंडारण करने के लिए रामकी एनवायरो फार्मा लिमिटेड को नियुक्त किया। इस बीच परिसर में 346 ​टन जहरीले कचरे की पहचान की गई। अक्टूबर 2006 हाई कोर्ट ने 346 मीट्रिक टन जहरीले कचरे को अंकलेश्वर (गुजरात) भेजने का आदेश दिया। नवंबर 2006 में हाई कोर्ट ने पीथमपुर में टीएसडीएफ सुविधा के लिए 39 मीट्रिक टन चूना कीचड़ के परिवहन का आदेश दिया। अक्टूबर 2007 गुजरात सरकार ने भारत सरकार को पत्र लिखकर यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा अंकलेश्वर स्थित भरूच एनवायर्नमेंटल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में जलाने में असमर्थता व्यक्त की। अक्टूबर 2009 टास्क फोर्स की 18वीं बैठक में पीथमपुर में 346 मीट्रिक टन जहरीले कचरे को भेजने का निर्णय लिया गया। यह काम अगले ही महीने यानी नवंबर में शुरू हो गया क्योंकि अंकलेश्वर में कचरा भेजना असंभव लग रहा था। अक्टूबर 2012 मंत्रियों के समूह ने ट्रायल के तौर पर 10 मीट्रिक टन जहरीले कचरे को पीथमपुर में टीएसडीएफ सुविधा में जलाने का निर्णय लिया। अप्रैल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने पीथमपुर में 10 टन कचरा नष्ट करने की योजना बनाने को कहा। दिसंबर 2015 सुप्रीम कोर्ट ने 337 मीट्रिक टन जहरीले कचरे को पीथमपुर संयंत्र में निपटाने का निर्देश दिया। इसके बाद अप्रैल 2021 में मप्र सरकार ने इस कचरे के निपटान के लिए निविदाएं आमंत्रित कीं। नवंबर में 2021 में रामकी को टेंडर दे दिया गया। दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट ने जहरीले कचरे के निपटान मेंे हो रही देरी पर फटकार लगाते हुए कहा कि एक महीने के भीतर यूका से कचरा हटाया जाए। इसके बाद कवायद तेज हुई।

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