शहर में नगर निगम अब कचरे को सेम डे निस्तारण करने और उसके अलग अलग उपयोग को लेकर आरडीएफ प्लांट शुरू करेगा। इसका ट्रायल इसी महीने से शुरू हो जाएगा। आयुक्त ओमप्रकाश ने नान्ता स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड तथा आंवली रोझड़ी में निर्माणाधीन आरडीएफ प्लांट का निरीक्षण किया। जिसमें उन्होंने आरडीएफ प्लांट स्थापना काम की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि प्लांट के लिए आवश्यक मशीनें साइट पर पहुंच चुकी हैं और जल्द ही इन्हें स्थापित करने का काम शुरू कर दिया जाएगा। लंबे समय से आरडीएफ प्लांट की जरूरत कोटा को थी। कोटा के नांता ट्रेचिंग ग्राउंड में कचरे के पहाड़ बने हुए हैं। हालांकि इन्हें डिस्पोज करने के लिए लिगेसी वेस्ट प्लांट शुरू कर दिया गया है। लेकिन कचरे के ये पहाड़ इतने ज्यादा है और उसके अलावा रोज शहर से आने वाले कचरे का सेम डे निस्तारण भी जरूरी है। ऐसे में आरडीएफ प्लांट इसके लिए काफी अहम है। इस प्लांट से सेम डे ही कचरे के निस्तारण का काम शुरू होगा, जिसमें वेस्ट में अलग अलग चीजों को अलग किया जाएगा। जिनमें जो काम आने वाली चीजें है उनका उपयोग भवन निर्माण, रिसाइकिलिंग, फ्यूल निर्माण में किया जा सकेगा। इधर, लिगेसी वेस्ट प्लांट से करीब ढाई लाख क्यूबिक मीटर कचरे का प्रसंस्करण पहले जुलाई अंत तक पूरा किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन मशीनों की संख्या बढ़ने से अब यह काम मई-जून तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि आंवली रोझड़ी में आरडीएफ प्लांट के लिए बाउंड्री वॉल का निर्माण काम पूरा हो चुका है। क्या है आरडीएफ प्लांट
इस प्लांट में हर दिन आने वाले कचरे का निस्तारण किया जा सकता है। जिससे ट्रेचिंग ग्राउंड में कचरा इकटठा नहीं होगा। इस प्रक्रिया में कचरे से हाय कैलोरीफिक वैल्यू वाला ईंधन तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग सीमेंट फैक्ट्रियों, थर्मल पावर प्लांट्स और अन्य उद्योगों में कोयले के विकल्प के रूप में किया जाता है। ये न केवल कचरे के निस्तारण में सहायक है, बल्कि पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता को भी कम करता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिलता है। इसमें प्लास्टिक, कागज, कार्डबोर्ड, लकड़ी और रबर जैसे जलने वाले कचरे का उपयोग होता है। वहीं धातु, कांच को अलग किया जाता है।


