कटेकल्याण सीएचसी में गंदे बिस्तर से संक्रमण का खतरा, पूरे परिसर में गंदगी

भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में जहां संक्रमण फैलने से कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई। बावजूद जिले में अस्पतालों के प्रति स्वास्थ्य विभाग लापरवाह बना हुआ है। कटेकल्याण के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत इतनी खराब है कि पूरे अस्पताल परिसर में बदबू से मरीजों व परिजनों का बुरा हाल है। बिस्तर व तकियों की हालत ऐसी है कि बच्चों सहित मरीजों में आसानी से संक्रमण फैल सकता है। 20 बिस्तर वाले इस अस्पताल में करीब 7 बच्चे भर्ती हैं, जिन्हें गंदे बिस्तर व तकियों के कारण संक्रमित होने का खतरा बढ़ गया है। पूरे अस्पताल परिसर में गंदगी और अव्यवस्थाओं का आलम है। पोषण पुनर्वास केंद्र में जाने से पहले लोगों को बदबू से बचने अपनी नाक को ढंककर जाना पड़ता है। कटेकल्याण सीएचसी पर 30 से ज्यादा गांवों के ग्रामीण निर्भर हैं। अस्पताल भवन बुरी तरह जर्जर हो चुका है, जिसकी मरम्मत के लिए हर साल लाखों के टेंडर जारी किए जा रहे हैं,फिर भी स्थिति जस की तस है। बिजली व्यवस्था पहले से ही खस्ताहाल है, वहीं जनरेटर और सौर ऊर्जा से चलने वाली व्यवस्था भी खराब पड़ी हुई है। बताया जाता है कि कुछ महीने पहले अस्पताल भवन की मरम्मत पर 8 लाख रूपए खर्च किए गए, बावजूद टॉयलेट-बाथरूम की मरम्मत ही नहीं की जा सकी है। मरीज परिजन को बाहर जाना पड़ता है। खुद निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को ठीक कराऊंगा: कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि अस्पतालों में जो भी गड़बड़ी व अव्यवस्थाएं हैं, उन्हें तत्काल दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे खुद सभी अस्पतालों का निरीक्षण करते हुए व्यवस्थाओं को ठीक करेंगे। जिपं सदस्य तूलिका कर्मा ने अव्यवस्था के लिए सरकार को जिम्मेदार बताते सरकार के सुशासन तिहार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। भारी अव्यवस्था से मरीज जूझ रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के वेंटिलेटर पर होने की आरोप लगाया। वहीं जर्जर भवन की मरम्मत के नाम पर हर साल लाखों रुएप का भ्रष्टार किया जा रहा। जिले में 4-4 करोड़ रूपए की लागत से दो सीएचसी भवन का निर्माण जा रहा है, जिसमें एक कुआकोंडा व दूसरा कटेकल्याण में बनाया जा रहा है। दो साल बाद भी दोनों भवनों का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है। 50 लाख के काम करने की क्षमता वाली ग्राम पंचायत को दोनों जगहों पर निर्माण एजेंसी बनाया गया। 4 करोड़ की राशि का 40 फीसदी यानि 1.60 लाख रूपए जारी कर दिए गए।

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