सीहोर के कुबरेश्वर धाम में कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने ‘द्वादश ज्योतिर्लिंग गार्डन’ में ‘ग्रीन शिवरात्रि’ थीम पर पौधा लगाया है। इस गार्डन में 12 विशेष पौधे लगाए हैं। प्रदीप मिश्रा ने कहा है कि पर्यावरण-हितैषी आयोजन आध्यात्मिकता को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि पौधे 12 ज्योतिर्लिंगों का प्रतिनिधित्व करने वाले हैं। इन पौधों को धाम से उनकी वास्तविक भौगोलिक दूरी के आधार पर ‘स्केल डिस्टेंस’ पद्धति से रोपित किया है। इनमें श्री महाकालेश्वर (127 किमी), श्री ओंकारेश्वर (135 किमी), श्री केदारनाथ (864 किमी) और श्री रामेश्वरम (1557 किमी) जैसे प्रमुख ज्योतिर्लिंगों की दूरियों को दर्शाया है। देशभर से पहुंच रहे हैं लोग
7 दिवसीय महोत्सव की शुरुआत शनिवार से शुरू हुई जो 20 फरवरी तक चलेगा। इसमें शामिल होने के लिए महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, बिहार समेत देश भर से अब तक 2 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे चुके हैं। लोगों को समस्या न हो इसके लिए व्यवस्था संभालने के लिए 1200 से अधिक सेवादार तैनात किए गए हैं। महोत्सव में प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक श्री शिवमहापुराण कथा का वाचन हो रहा है। वहीं, शाम 6:30 बजे संध्या महाआरती का आयोजन किया जा रहा है। कुबरेश्वर धाम का ड्रोन व्यू देखिए मिश्रा बोले- यहां वही आता, जिससे बाबा प्रेम करते हैं
पंडित मिश्रा ने बताया कि यह धाम 12 ज्योतिर्लिंगों के मध्य में स्थित है और यहां वही आता है जिससे बाबा स्वयं प्रेम करते हैं। सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हुए कहा, बेटी आपके पुण्यों की रसीद है। उन्होंने कहा अब केवल ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ ही नहीं बल्कि ‘बहू पढ़ाओ, देश बचाओ’ के संकल्प की आवश्यकता है। जिस घर में बेटी और बहू का सम्मान होता है, वहां दरिद्रता कभी नहीं आती। शादी में पानी बर्बादी रोकने पर जोर
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि शादियों में पानी की बर्बादी रोकना अनिवार्य है। पानी की बोतलों पर लिखा होना चाहिए “मैं जल हूं, आने वाला कल हूं। यदि हमने आज जल का सम्मान नहीं किया, तो भविष्य में इसके लिए तरसना पड़ेगा। उन्होंने समझाया कि मंदिर में सिर झुकाना भगवान के ‘चरणों’ में होना है, लेकिन मंदिर से निकलकर कार्यक्षेत्र पर जाते समय भगवान को याद रखना उनकी ‘शरण’ में होना है। कुबरेश्वर धाम में चल रहे महोत्सव को देखने नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…


