भास्कर न्यूज | अलवर कथा वाचक सुमेर गिरि महाराज ने कहा कि भगवान कृष्ण ने बर्बरीक को नया नाम श्याम दिया था। इसी कारण बर्बरीक को श्रद्धालु श्याम बाबा के नाम से जानते हैं। वे स्कीम नंबर दो स्थित बैकुंठधाम मंदिर के 56 वें स्थापना दिवस पर चल रहे दस दिवसीय कार्यक्रम के 8 वें दिन श्याम कथा का वाचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बर्बरीक महाभारत काल के एक अजेय योद्धा, घटोत्कच के पुत्र और भीम के पौत्र थे। बर्बरीक ने मां को वचन दिया था कि वह युद्ध में हमेशा कमजोर पक्ष का साथ देंगे। वे केवल तीन बाण लेकर युद्धभूमि में आए थे। भगवान कृष्ण जानते थे कि पांडव जीतने वाले हैं, लेकिन अगर वे कमजोर पड़ते, तो बर्बरीक कौरवों की ओर से लड़ते और युद्ध का पासा पलट देते। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध में धर्म की विजय सुनिश्चित करने के लिए ब्राह्मण भेष में बर्बरीक से उनका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने उन्हें अपना शीश अर्पित कर दिया। इसीलिए उन्हें शीश का दानी कहा जाता है। बर्बरीक के इस बलिदान से प्रसन्न होकर कृष्ण ने उन्हें कलयुग में खाटू श्याम के नाम से पूजे जाने और हारे का सहारा बनने का वरदान दिया। शनिवार दोपहर 3 बजे संगीतमय सुंदरकांड का पाठ होगा। 1 मार्च को सुबह 10 बजे हवन और दोपहर 12 बजे प्रसाद वितरण होगा।


