कनाडा के क्रिकेटर नवदीप ने मोहाली में सीखी है क्रिकेट:मन की बात में पीएम ने किया जिक्र, कोच बोले- बचपन से समर्पित रहा

पीएम नरेंद्र मोदी ने कनाडा क्रिकेट टीम के जिस प्लेयर नवनीत धालीवाल का जिक्र ‘मन की बात’ में रविवार किया, उसका संबंध चंडीगढ़ ही नहीं, मोहाली से भी है। उसने अपनी क्रिकेट की एबीसी मोहाली में ही सीखी है। यह जिक्र खुद नवनीत कर चुके हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पीसीए मोहाली में कोचिंग ली थी। उनके टेक्निकल कोच सुखविंदर सिंह टिंकू हैं। इन दिनों टिंकू ऑस्ट्रेलिया में हैं। वह भी अपने शिष्य के इस सफर को लेकर काफी उत्साहित हैं। वह कहते हैं कि उसमें शुरू से ही लगन व समर्पण भाव था, जिससे वह इस स्तर तक पहुंचा है। वह कनाडा की टी-20 वर्ल्ड कप खेल रही क्रिकेट टीम में हिस्सा थे। नवनीत ने 19 फरवरी को चेन्नई में अफगानिस्तान के खिलाफ मैच में सन्यास ले लिया। 2 प्वाइंटों में जानें कोच ने नवदीप को लेकर क्या कहा – 2002 में मैंने उसे कोचिंग शुरू की थी कोच बताते है कि साल 2002 की बात है। नवदीप के पापा उसे मेरे पास लेकर आए थे। उस समय मैंने भी कोचिंग का अपना करियर शुरू किया था। वह चाहते थे कि वह टॉप क्लास का क्रिकेटर बने। वह फास्ट बॉलर था। इस दौरान उसे इंजरी हो गई थी। डॉक्टरों ने उसे छह महीने बॉलिंग न करने की नसीहत दी। ऐसे में मैंने उसे बैटिंग के लिए तैयार किया। क्योंकि इंजरी के बाद घर में नहीं बैठाना चाहता था। लगन इतनी की बारिश में ग्राउंड पर पहुंच गया शुरूआती कोचिंग फेज-चार में दी। इसके बाद वह पीसीए मूव कर गए। उन दिनों उनके पास स्कूटर होता था। मैं सुबह पांच बजे पीसीए बुलाता था। एक दिन सुबह बहुत तेज बारिश हो रही थी। लेकिन नवदीप पांच बजे ही पीसीए पहुंच गया था। वह कॉरिडोर में प्रैक्टिस में जुट गया, जबकि मैं घर पर था। बारिश में उसका फोन आया“सर, आप आए नहीं, मैं ग्राउंड पहुंच गया।” मैं उसकी इस लगन से काफी प्रभावित हुआ। इससे एक बात साफ हो गई थी कि उसका क्रिकेट करियर बहुत लंबा है। पीसीए के सिलेक्टर भी उससे प्रभावित थे। दो प्वाइंटों में जानें पत्नी की नजर से धालीवाल बचपन से ही क्रिकेट खेलते थे
राजनदीप कौर बताती हैं कि हम दोनों स्कूल में साथ पढ़ते थे। उस समय भी वह क्रिकेट खेलते थे, लेकिन हमारी आपस में ज्यादा बातचीत नहीं होती थी। बाद में हम कुछ कॉमन दोस्तों के जरिए दोबारा मिले। उस समय मुझे नहीं पता था कि वह क्रिकेट के प्रति इतने जुनूनी हैं। जीवन के हर पड़ाव पर मेरा साथ
नावी बहुत जुनूनी, मेहनती और स्वभाव से बहुत शांत व्यक्ति हैं। लेकिन जब बात क्रिकेट की आती है, तो वह बिल्कुल अलग हो जाते हैं। वह बहुत समर्पित और केंद्रित रहते हैं। उनका सफर बेहद शानदार और प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने मेरे जीवन के हर पड़ाव पर मेरा साथ दिया। वह मेरे करियर के दौरान हर समय मेरे साथ खड़े रहे। मजाक में कहूं तो वह आधे दंत चिकित्सक (डेंटिस्ट) जैसे बन गए थे, क्योंकि हर समय मेरी देखभाल करते थे। कोचिंग देते ही क्रिकेट टीम चले गए नवदीप बताते हैं कि इंडिया से वह कनाडा आ गए। जब मेरे पास करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं था, तो मैंने कुछ बच्चों को कोचिंग देना शुरू कर दिया। कोचिंग शुरू में सिर्फ मनोरंजन के लिए थी। उसके बाद जब मैं कोचिंग दे रहा था, तो किसी ने मुझे नेट्स में बल्लेबाजी करते हुए देखा। उन्हें लगा कि मुझे उनके साथ जुड़ना चाहिए। उन्होंने मुझसे कहा कि हमारे क्लब यॉर्कशायर से जुड़कर हमारे लिए खेलना शुरू करो। मैंने उनकी बात मान ली। पहले 3-4 सालों में मैंने काफी रन बनाए। उसके बाद जब मैं क्वालिफाई हुआ, तो मैं कनाडाई टीम में चयन के बहुत करीब पहुंच गया था। इसके बाद यह सफर हुआ। इसलिए छोड़ी थी कप्तानी नवदीप पहले कनाडा टीम के कप्तान थे। साल 2023 में मेरा प्रदर्शन बहुत अच्छा चल रहा था। वह मेरे करियर का स्वर्णिम दौर (प्राइम) था। उसी समय मेरी पत्नी मां बनने वाली थीं, इसलिए मुझे ब्रेक लेना पड़ा। मुझे कप्तानी भी छोड़नी पड़ी। टीम प्रबंधन ने मुझसे वादा किया था कि जब मैं वापस आऊंगा तो मुझे फिर से कप्तानी सौंप दी जाएगी। लेकिन मेरा ब्रेक उम्मीद से थोड़ा लंबा हो गया। ऐसे में टीम को क्रिकेट के हित में अगला कदम उठाना पड़ा, जो खेल के लिहाज से सही था। हालांकि शुरुआत में यह मेरे लिए आसान नहीं था। मैंने सोचा था कि मैं इसे सहज रूप से स्वीकार कर लूंगा, लेकिन अंदर से यह उतना सरल नहीं था।

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