कौशल्या माता विहार योजना (कमल विहार) स्थित डूंडा में सरकारी जमीन पर अवैध प्लाटिंग का खेल पिछले कई सालों चल रहा था। अवैध कॉलोनाइजरों द्वारा आरडीए की जमीन को अपना बताकर सस्ती कीमत पर बेच दिया गया था। कुछ लोगों ने तो जमीन पर मकान भी बना लिया है। शनिवार को जिला प्रशासन, नगर निगम और आरडीए की टीम ने अवैध रुप से बेची गई जमीन पर बुलडोजर चला दिया। कमल विहार सेक्टर-11 में कच्चे और पक्के मकानों को तोड़ा गया। तोड़फोड़ की कार्रवाई करने पहुंचे अफसर खुद हैरान रह गए कि कमल विहार की जमीन पर अवैध प्लाटिंग हो रही है और यहां के जिम्मेदार अधिकारियों को भनक नहीं लगी। कौशल्या माता विहार योजना के अंतर्गत ग्राम डूंडा 26 एकड़ जमीन है। अवैध कॉलोनाइजर द्वारा इसी के कुछ हिस्से में अवैध प्लाटिंग के बाद फर्जी दस्तावेज बनाकर उसे बेच दिया था। इसी जमीन पर 30 से 40 पक्के मकान बन गए थे। करीब आधा दर्जन से अधिक मकान पिछले एक साल से निर्माणाधीन हैं। आरडीए ने यहां कब्जा करने वालों को जमीन खाली करने के लिए करीब आधा दर्जन से अधिक बार नोटिस दिय था। उसके बाद भी लोग जमीन खाली नहीं कर रहे थे। शनिवार की सुबह 4 बजे जिला प्रशासन, नगर निगम के सभी जोन कमिश्नर, पुलिस और रायपुर विकास प्राधिकरण के 150 अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम जेसीबी लोडर मशीन के साथ के साथ पहुंची। टीम सुबह 5 बजे से अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई शुरू किया जो 10.30 बजे तक चला। सरकारी जमीन पर बनाया था फार्म हाउस आरडीए के अफसरों ने बताया कि सरकारी जमीन पर फार्म हाउस बना दिया था। इसमें आधा दर्जन से अधिक गाय बांधी गई थी। सुरक्षा के लिए गार्ड भी तैनात था। अफसरों ने इसे तोड़ दिया लेकिन ये नहीं बता रहे हैं कि ये किसका कब्जा था। तोड़फोड़ के दौरान पता चला कि वहां कुछ अवैध मकानों में सीसीटीवी कैमरा है। कार्रवाई के दौरान एसडीएम. नंद कुमार चौबे, आरडीए सीईओ शिम्मी नाहिद, नगर निगम जोन कमिश्नर और पुलिस विभाग की टीम मौजूद थी।


