करणी औद्योगिक विस्तार में प्रदूषित जल की निकासी करने वाली 29 औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। केंद्रीय भू जल बोर्ड ने भी जिला कलेक्टर से एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। करणी औद्योगिक क्षेत्र प्रथम, द्वितीय और एसजीसी (स्प्रीट ग्रोथ सेंटर) का प्रदूषित पानी करणी विस्तार के करीब 62 बीघा में सालों से पसरा पड़ा है। इसका निस्तारण करने के लिए एनजीटी के फैसले के बाद पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने राज्य स्तरीय पर्यावरण निगरानी एवं प्रत्युत्तर समिति का गठन किया है। इस समिति की पहली बैठक के मिनिट्स जारी हो गए हैं, जिसमें रीको और प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सख्त निर्णय लिए गए हैं। मिनिट्स की कॉपी भास्कर के पास मौजूद है, जिसमें सीईटीपी की स्थापना की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश रीको को दिए गए हैं। पर्यावरण स्वीकृति के तहत जीरो लिक्विड डिस्चार्ज आधारित तंत्र अनिवार्य कर दिया गया है। छह माह के भीतर सीईटीपी की स्थापना नहीं करना निरंतर उल्लंघन की श्रेणी में माना जाएगा। इस मामले में पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से समिति को रिपोर्ट दी गई है, जिसमें साफ लिखा गया है कि बिना उपचार अपशिष्ट जल का निस्तारण किया जा रहा है। व्यक्तिगत ईटीपी (ईफल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) का प्रदर्शन भी अपर्याप्त है। इसे देखते हुए सीईटीपी (कॉमन ईफल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) की विधि सम्मत स्थापना को आवश्यक बताया गया है। राज्य स्तरीय समिति ने जरूरत पड़ने पर उन उद्योगों को बंद करने के निर्देश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को दे दिए हैं, जिनमें ईटीपी काम नहीं कर रहा है। रीको के करणी औद्योगिक क्षेत्र में 29 इकाइयों से प्रदूषित जल की निकासी होती है। समिति के फैसले से औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। कलेक्टर से मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट, अनधिकृत बोरवेल सीज होंगे केंद्रीय भू जल प्राधिकरण की ओर से राज्य स्तरीय समिति को दी गई रिपोर्ट के आधार पर समिति ने जिला कलेक्टर से रीको औद्योगिक क्षेत्र में भू जल दोहन के संबंध में एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ अनधिकृत बोरवेल को तत्काल सीज करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा रीको से भूजल दोहन एवं आपूर्ति की स्थिति के संबंध में 14 दिन में विस्तृत लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। दूसरी तरफ समिति के निर्देश के बाद जिला कलेक्टर ने सभी उपखंड अधिकारियों को पत्र लिखकर अनधिकृत भूजल दोहन के संबंध में कार्यवाही की सूचना मांगी है। भूजल दोहन के लिए जिले में 32 व्यावसायिक इकाइयों के पास एनओसी है। रीको की ओर से एनओसी के लिए किए गए आवेदन भी निरस्त कर दिए गए हैं। बिना अनुमति भूजल दोहन को अवैध माना गया है। करणी इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन एरिया का सर्वे अब तक नहीं किया जा सका रीको के करणी औद्योगिक क्षेत्र में प्रथम, द्वितीय और एसजीसी का सर्वे हो चुका है। इनमें 29 औद्योगिक इकाइयों से प्रदूषित पानी निकलता है। इसमें अधिकांश वूलन इंडस्ट्रीज हैं। करणी में कुल 361 इकाइयां संचालित हैं। इन इकाइयों का पानी करणी विस्तार में जमा होता है। हैरानी की बात है कि करणी विस्तार का अब तक सर्वे ही नहीं हो पाया है। वहां भी वूलन और फूड इंडस्ट्रीज से प्रदूषित पानी निकलता है। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की। जीरो लिक्विड डिस्चार्ज का पालन नहीं किया जा रहा। ग्रीन बेल्ट तक विकसित नहीं की गई है। ग्रे वॉटर और ब्लैक वाटर का मिश्रण हो रहा है। वर्षा जल निकासी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। यही कारण है कि करणी विस्तार के 62 बीघा क्षेत्र में केमिकल युक्त प्रदूषित पानी पसरा पड़ा है, जिसका असर आसपास की फूड इंडस्ट्रियों पर पड़ रहा है।


