जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, करौली ने गवर्नमेंट सामान्य चिकित्सालय करौली में अवैध पार्किंग वसूली के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने इसे उपभोक्ताओं का गंभीर आर्थिक शोषण मानते हुए अस्पताल प्रशासन पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। साथ ही, पीड़ित उपभोक्ता को भी मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। यह मामला परिवादी बाबूलाल मीणा से जुड़ा है, जो 8 अक्टूबर 2025 को सामान्य चिकित्सालय करौली गए थे। अस्पताल परिसर में उनकी मोटरसाइकिल से निर्धारित 10 रुपए के बजाय 20 रुपए पार्किंग शुल्क वसूला गया। जब परिवादी ने इसका विरोध किया, तो पार्किंग कर्मचारियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उनकी बाइक के इंडिकेटर व लाइट तोड़कर नुकसान पहुंचाया। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह और सदस्य सुरेन्द्र चतुर्वेदी ने पाया कि प्रमुख चिकित्सा अधिकारी की ओर से पार्किंग ठेके की वैधता या उसके संचालन से संबंधित कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। आयोग ने इस कृत्य को अनुचित व्यापार व्यवहार और आर्थिक अपराध की श्रेणी में रखा। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बिना वैध टेंडर और अनुमति के आमजन से पार्किंग शुल्क वसूलना नियमों का उल्लंघन है, जिससे उपभोक्ताओं का शोषण होता है। ‘रेस्पॉन्डेंट सुपीरियर’ सिद्धांत के आधार पर अस्पताल प्रशासन को इस पूरे मामले के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। आदेश के तहत अस्पताल प्रशासन को परिवादी को मानसिक पीड़ा के लिए 1 लाख 50 हजार रुपए, परिवाद व्यय के लिए 15 हजार रुपए और अवैध रूप से वसूले गए 20 रुपए लौटाने होंगे। इसके अतिरिक्त बड़े पैमाने पर की गई अवैध वसूली के दंडस्वरूप 10 लाख रुपए राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का भी निर्देश दिया गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि 30 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित राशि पर 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में इस फैसले को एक महत्वपूर्ण नजीर के रूप में देखा जा रहा है।


