भास्कर न्यूज | महासमुंद सरायपाली ब्लॉक के तोरेसिंहा ब्रांच के अंतर्गत आने वाली सेवा सहकारी समिति केना में करोड़ों रुपए के केसीसी लोन फर्जीवाड़े के मामले ने किसानों को परेशानी में डाल दिया है। इस घोटाले में अब 35 से अधिक नए पीड़ित किसान सामने आए हैं, जिनके दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर लाखों का फर्जी लोन निकाला गया है। कई किसानों को पता ही नहीं है कि उनके नाम पर लाखों का केसीसी लोन है। केसीसी यानी किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए लोन फर्जीवाड़ा 2023-24 का है। इस फर्जीवाड़ा में किसानों के रकबे में कूट रचना कर फर्जी तरीके से किसानों का रकबा बढ़ाया गया है और कूट रचना कर बढ़ाए गए रकबे के हिसाब से तोरेसिंहा सहकारी बैंक से केसीसी लोन निकाला गया है। करीब 35 से ज्यादा किसानों के नाम पर 1 करोड़ 20 करोड़ रुपए से अधिक केसीसी लोन निकाला गया है। किसानों का कहना है कि इस फर्जीवाड़ा में भीष्मदेव पटेल, श्याम सुन्दर पटेल, राज कुमार प्रधान और युवराज नायक शामिल हैं। इन्हीं लोगों ने मिलकर फर्जीवाड़ा कर किसानों को कर्जदार बनाया है। किशोर ग्राम केना इनके पास कुल खेती की जमीन 0.2900 हेक्टेयर यानी सिर्फ लगभग 73 डिसमिल है। इनके नाम पर 2023-24 में 373706 रुपए लोन निकाला गया है। निलाद्री साहू ग्राम इच्छापुर इनके पास 0.4900 हेक्टेयर जमीन है। यानी एकड़ 1 एकड़ 13 डिसमिल है। इनके नाम पर 2023-24 में 355082 रुपए लोन निकाला गया है। उतर कुमार भोई ग्राम टेंगनापाली के पास 0.2400 हेक्टेयर जमीन यानी सिर्फ 60 डिसमिल है। इनके नाम पर 2023-24 में 3.83 लाख 193 रुपए लोन निकाला गया है। जबकि 60 डिसमिल खेती की जमीन में 11000 रुपए से ज्यादा केसीसी लोन की पात्रता ही नहीं है। जबकि किसान को इसके बारे में पता ही नहीं है। बैंक में राशि निकालने जाने पर इसकी भनक लगी। नानकपाली के किसान खिरसागर के पास खेती की जमीन 0.2600 हेक्टेयर यानी सिर्फ 65 डिसमिल है। इनके नाम पर 2023-24 में ही 3.87 लाख लोन निकाला गया है। जबकि 65 डिसमिल खेती की जमीन में 12000 रुपए से ज्यादा की पात्रता ही नहीं है। किसान ने बताया कि खाद लेने जाने पर कर्ज की बात पता चली। देव कुमार भोई ग्राम टेंगनापाली इनके पास कुल खेती की जमीन 0.2700 हेक्टेयर यानी सिर्फ लगभग 68 डिसमिल है। इनके नाम पर 2023-24 में 307416 रुपए लोन निकाला गया है। जबकि बैंक से लोन ही नहीं लिया था। और उनके खाते में कैसे कर्ज चढ़ गया पता ही नहीं है। किसान चंचला के नाम 1 लाख 88 हजार 611 का धान बेचा है। इसी दौरान उनके पर 3 लाख 1 हजार रुपए लोन चढ़ा है। इसमंे से सिर्फ 57 हजार रुपए का लोन बैंक की तरफ से काटा गया है। जबकि किसान की पूरी राशि कटनी थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अगर किसानों के ऋण पुस्तिका में रकबा कम है, तो इसे किसने कूटरचना कर बढ़ाया, जिस आधार पर केसीसी लोन पास हुआ। तोरेसिंहा सहकारी बैंक के तत्कालीन सुपरवाइजर श्याम सुन्दर पटेल ने किसान के ऋण पुस्तिका में रकबा कम होने के बाद भी समिति प्रभारी द्वारा दिए ऋण पत्रक को मिलान क्यों नहीं किया। जब किसानों ने ऋण जमा नहीं किया, तो वर्तमान सुपरवाइजर राजकुमार प्रधान ने रिकवरी के लिए नोटिस क्यों नहीं भेजा। किसानों के घर ऋण वसूली के लिए क्यों नहीं गए।


