महिलाएं आज अपने आपको हर क्षेत्र में सशक्त कर रही हैं। इसमें उद्यमिता एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें आए दिन नए-नए नाम जुड़ते जा रहे हैं। जिन्होंने शून्य से अपने काम को शुरू किया और आज ये महिला उद्यमी सिर्फ अपने आप को सशक्त ही नहीं कर रहीं, बल्कि अपने आसपास की महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं। ऐसी ही कहानी है, धुर्वा की ओहमंती मिंज और चुटिया में रहने वाली निशा झा की। ओहमंती ने स्वयंसेवी संस्था से प्रशिक्षण लिया और आज खुद महिलाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजगार दे रही हैं। अभी वह पापड़, आंवला कैंडी, चूर्ण, जामुन का सिरका, जामुन के बीज का पाउडर समेत कई चीजें बनाती हैं। वहीं, निशा झा मसाला, बरी, आचार, ठेकुआ और पेड़किया आदि बनाकर घर-घर भेजती हैं और ऑनलाइन भी बेचती हैं। {कई को रोजगार से जोड़ा : आज 5 महिलाओं का समूह सारी चीजें बना रहा है। यहां बना सामान देश के कोने-कोने में जा रहा है। सिर्फ रांची में ही 150 से अधिक परिवारों को सामान घर तक पहुंचाती हैं। {कितने लोगों को रोजगार से जोड़ा : इनके साथ 5 महिलाएं काम कर रही हैं। इनमें सृष्टि मुंडा, बहामनी मुंडा, दयामनी मुंडा, शोभा तिर्की, प्रतिमा तिर्की शामिल हैं। {ऐसे हुई शुरुआत :लोगों से कर्ज लेकर साल 2020 में 5-5 किलो सामान के साथ मिथिलानी गृह उद्योग की शुरुआत की। मशीन अॉनलाइन मंगाई और काम शुरू किया। मसाला, बरी, आचार, ठेकुआ और पेड़किया बनाए और घर-घर जाकर सामान बेचा।
{ऐसे हुई शुरुआत : ओहमंती ने वर्ष 2023 में 7500 रुपए का लोन लेकर इस काम को शुरू किया था। अभी वह पापड़, आंवला कैंडी, चूर्ण, जामुन का सिरका, जामुन के बीज का पाउडर, अजवाइन का चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, सहजन का पाउडर एवं उरद की बरी समेत 10 अलग-अलग चीजें बनाती हैं। आज इनकी सालाना कमाई लाखों में है। इस काम में उनके पति अजय सोरेन का पूरा सहयोग मिलता है।
{आइडिया कैसे आया : कोविड के दौरान कॉस्मेटिक की दुकान बंद हो गई, पति की भी दुकान बंद हो गई। घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई। जब कोविड का दौर थोड़ा कम हुआ, तो घर-घर जाकर सामान बेचा, पर लोगों का भरोसा जीतने में बहुत संघर्ष किया।
{आइडिया कैसे आया : गर्मी के मौसम में ओहमंती खजूर की चटाई और झाड़ू बनाती थीं, लेकिन इससे इतनी कमाई नहीं होती थी कि परिवार का गुजारा चल सके। तभी स्तंभ नामक संस्था के लोग उनके पास आए और उन्हें खाने में काम आने वाली कई चीजें बनाने का प्रशिक्षण दिया। निशा झा : मसाला-बरी बनाकर घर-घर तक पहुंचाती हैं ओहमंती मिंज : 2023 में 7500 रु. का लोन लिया था


