राजस्थान सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को लेकर कर्मचारी संगठनों और किसान नेताओं ने बजट को निराशाजनक बताया है। सरकार पर वादाखिलाफी और संवेदनहीनता के आरोप लगाए गए हैं। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ जयपुर के प्रदेशाध्यक्ष महावीर शर्मा ने कहा कि यह बजट कर्मचारियों, संविदा कार्मिकों, मानदेय कार्मिकों और पेंशनरों के लिए निराशावादी हैै। उन्होंने बताया कि बजट भाषण में कर्मचारियों के मुद्दों पर मात्र तीन मिनट चर्चा हुई और इस दौरान सदन में किसी भी सदस्य ने समर्थन नहीं जताया। अहम विषयों पर कोई ठोस निर्णय नहीं उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पदोन्नति विसंगति, वेतन विसंगति और आठवें वेतन आयोग जैसे अहम विषयों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। समितियों के गठन के नाम पर समय टालने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश के करीब 8.5 लाख कर्मचारियों, 5 लाख संविदा कर्मियों और 2.5 लाख से ज्यादा मानदेय कर्मियों के लिए बजट में कोई विशेष घोषणा नहीं की गई। मुख्यमंत्री से शीघ्र द्विपक्षीय वार्ता की मांग अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने भी बजट को कर्मचारी विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि बजट पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन पूरे नहीं हुए। वेतन, पदोन्नति और भत्तों पर बजट पूरी तरह मौन रहा। उन्होंने मुख्यमंत्री से शीघ्र द्विपक्षीय वार्ता की मांग की। पिछली घोषणाएं अधूरी, नई भी कर दी किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि पिछले बजट की घोषणाएं अभी तक पूरी नहीं हुई हैं और इस बार भी नई घोषणाओं की बौछार कर दी गई। मंडी निर्माण, कृषि कनेक्शन, सिंचाई परियोजनाएं, बीज वितरण और प्रशिक्षण योजनाएं अब तक अधूरी हैं। उन्होंने बजट में अंग्रेजी शब्दों की अधिकता पर भी नाराजगी जताई। रामपाल जाट ने कहा कि किसानों को फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी नहीं मिली और सिंचाई योजनाओं को भी प्राथमिकता नहीं दी गई। युवाओं के लिए स्थायी रोजगार की बजाय संविदा नौकरियों पर जोर दिया गया, जिससे उनमें भी निराशा है। कर्मचारी संगठनों और किसान नेताओं ने कहा कि सरकार संवाद के बजाय उपेक्षा कर रही है। यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


