कर्म का फल मन की मंशा पर निर्भर: शून्य प्रभु

भास्कर न्यूज | लुधियाना गोइंदवाल गांव स्थित शनिगांव में शनिवार को विशेष धार्मिक समागम का आयोजन किया गया। हर शनिवार की तरह इस बार भी भारी संख्या में स्थानीय और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने शनि देव के दरबार में माथा टेका। समागम की शुरुआत मुख्य सेवादार कर्मजीत सिंह मान की देखरेख में विधिवत हवन-यज्ञ से हुई जिसमें विश्व शांति और जन-कल्याण की मंगल कामना के साथ आहुतियां डाली गईं। गुरु शून्य प्रभु ने जीवन में समर्पण और आंतरिक शुद्धि पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी कर्म का अच्छा या बुरा होना व्यक्ति की भावना पर निर्भर करता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि एक हत्यारा और सीमा पर खड़ा सैनिक दोनों ही प्राण लेते हैं, लेकिन उनके कर्मों का फल अलग होता है। क्योंकि उनकी मंशा भिन्न होती है। यदि प्रार्थना के पीछे सच्ची भावना नहीं है तो वह कभी फलित नहीं होती। भक्तों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए शून्य प्रभु ने बताया कि पूजा के समय मन भटकने का सबसे बड़ा कारण हमारी अधूरी इच्छाएं और स्वार्थ हैं। हम अक्सर प्रभु से प्रेम के कारण नहीं बल्कि जरूरतों के कारण जुड़ते हैं। उन्होंने मां और बच्चे के निश्छल रिश्ते का हवाला देते हुए कहा कि ईश्वर के प्रति शर्तहीन भक्ति होनी चाहिए। परमात्मा की स्तुति में कोई सौदा नहीं, केवल अगाध प्रेम होना चाहिए। विशेष आरती के बाद श्रद्धालुओं ने शनि देव पर तेल अर्पित किया। कार्यक्रम के समापन पर आयोजित अटूट भंडारे में हजारों की संख्या में संगत ने प्रसाद ग्रहण किया।

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