कलयुग में हरिनाम ही मुक्ति का मार्ग : इंद्रानुज दास

फतेहगढ़ चूड़ियां रोड स्थित वृंदावन गार्डन श्री गौर निताई इस्कॉन मंदिर में गौर भागवत सप्ताह का शुभारंभ हुआ। इस तीन दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन के प्रथम दिवस पर इंद्रानुज दास जिला अध्यक्ष इस्कॉन ने उपस्थित भक्तों को भगवान चैतन्य महाप्रभु के दिव्य जीवन और लीलाओं का वर्णन सुनाया। उन्होंने कहा कि एसी भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद जो कि इस्कॉन के संस्थापकाचार्य हैं ने बताया है कि चैतन्य महाप्रभु राधा-कृष्ण का मिलित अवतार हैं जो कलयुग में अवतरित हुए। उन्होंने पूरे विश्व में हरिनाम संकीर्तन का प्रचार-प्रसार किया और ‘हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे’ महामंत्र प्रदान किया जो कलियुग में तारक मंत्र (मुक्ति प्रदान करने वाला) है। इंद्रानुज प्रभु ने महाप्रभु की बाल्यकाल की लीलाओं का सुंदर वर्णन करते हुए उनके गंगा नदी में स्नान की क्रीड़ाओं तथा बाल-सुलभ चमत्कारी प्रसंगों को विस्तार से प्रस्तुत किया। कथा के माध्यम से भक्तगण गौर भगवान की करुणा और प्रेममयी भक्ति से भाव-विभोर हो उठे। अपने प्रवचन में इंद्रानुज प्रभु ने बताया कि किस प्रकार गौर भगवान का जीवन प्रारंभ हुआ तथा उनका विवाह माता विष्णुप्रिया देवी से संपन्न हुआ। तत्पश्चात गया यात्रा के दौरान उनकी भेंट ईश्वरपुरी से हुई, जिन्होंने उन्हें मंत्र दीक्षा प्रदान की। गया से लौटने के पश्चात महाप्रभु के जीवन में अद्भुत परिवर्तन आया और उन्होंने सांसारिक गतिविधियों का त्याग कर हरिनाम संकीर्तन आंदोलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर नित्यानंद प्रभु के नवद्वीप आगमन और महाप्रभु से उनके दिव्य मिलन का भी भावपूर्ण वर्णन किया। महाप्रभु द्वारा जगाई-माधाई तथा अत्याचारी चांद काजी के उद्धार की कथा ने श्रद्धालुओं को गहन आध्यात्मिक प्रेरणा प्रदान की। अंत में प्रभु जी ने महाप्रभु की संन्यास दीक्षा का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। यह गौर भागवत कथा 2 मार्च तक प्रतिदिन निरंतर चलेगी। 3 मार्च को पुष्प होली महोत्सव का आयोजन होगा।

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