भारतीय कला और संस्कृति के संरक्षण को लेकर कथक की वरिष्ठ गुरु एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रेरणा श्रीमाली ने सरकार की नीतियों पर सीधी और बेबाक राय रखी है। उन्होंने कहा कि जब तक कला एवं संस्कृति विभाग को स्वतंत्र मंत्री नहीं मिलेगा, तब तक इस क्षेत्र को न तो अपेक्षित बजट मिलेगा और न ही वह सम्मान, जिसकी वह हकदार है। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित थिएटर एक्सपर्ट प्रियदर्शनी मिश्रा के संवाद कार्यक्रम बतियन की गली में प्रेरणा श्रीमाली ने कहा कि पहले समय में कला और संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विभाग प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के अधीन होते थे, जिससे इन क्षेत्रों को सीधा संरक्षण और प्राथमिकता मिलती थी। उस दौर में सरकारें समझती थीं कि संस्कृति किसी राज्य या देश की आत्मा होती है। आज हालात यह हैं कि संस्कृति विभाग को पर्यटन के साथ जोड़ दिया गया है और सारा ध्यान पर्यटन पर चला गया है, जबकि कलाएं पीछे छूटती जा रही हैं। बजट की कमी से जूझ रही हैं कलाएं प्रेरणा श्रीमाली ने कहा कि कला संस्थानों और कलाकारों को लगातार बजट की कमी का सामना करना पड़ रहा है। आज शास्त्रीय और लोक कलाओं के लिए न तो पर्याप्त मंच हैं और न ही स्थायी योजनाएं। बजट की कमी के कारण प्रशिक्षण, शोध और प्रस्तुति तीनों ही प्रभावित हो रहे हैं। कार्यक्रम की परिकल्पक एवं युवा बिस्मिल्लाह खान अवार्डी प्रियदर्शिनी मिश्रा ने उनसे कला, संस्कृति और संस्थागत चुनौतियों पर सवाल किए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रेरणा श्रीमाली की शिष्या, कथक नृत्यांगना मनीषा गुलयानी द्वारा गुरु वंदना से हुई। संवाद के दौरान प्रेरणा श्रीमाली ने कहा कि कला को हर काल में संरक्षण की आवश्यकता रही है। बिना संरक्षण और स्पष्ट दिशा के हमारी सांस्कृतिक विरासत को बचा पाना संभव नहीं है। जयपुर कथक केंद्र की स्थिति पर चिंता जयपुर कथक केंद्र की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रेरणा श्रीमाली ने कहा कि यह संस्थान पचास वर्षों से अधिक पुराना होने के बावजूद प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर का कोई सशक्त कथक कलाकार तैयार नहीं कर पाया है। उन्होंने कहा कि किसी भी कला संस्थान की सफलता दूरदर्शी नेतृत्व और स्पष्ट नीति पर निर्भर करती है, जिसकी आज जयपुर कथक केंद्र को सख्त आवश्यकता है। कर्मठ युवा सम्मान इस अवसर पर ओरियन ग्रीन और रोहन एंड मृदुल कंपनी के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में उभरते तबला वादक मेहराज हुसैन को उनकी सशक्त ताल-समझ, संवेदनशील संगत और निरंतर रियाज के लिए ‘कर्मठ युवा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। आयोजकों ने इस सम्मान के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम के दौरान बालिका वधू सीरियल फेम लेखक और प्रेरणा श्रीमाली के छोटे भाई पुरेंदु शेखर ने वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी बहन की कथक यात्रा और कर्मठता को प्रेरणादायी बताया, जिससे माहौल भावुक हो गया। वहीं उनके बड़े भाई मनोज श्रीमाली ने स्वयं को गौरवान्वित भाई बताते हुए अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर प्रोफेसर माया टांक, समाजसेविका दीपा माथुर, दूरदर्शन के प्रोड्यूसर चेतन बठेजा, सहित कई नामी कलाकार और कला प्रेमी मौजूद रहे।


