कला सिर्फ रंग नहीं, पीढ़ियों की विरासत : शांतिलाल जोशी

भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा तेजी से बदलती आधुनिक जीवनशैली के बीच जहां पारंपरिक कलाएं हाशिये पर जा रही हैं, वहीं शाहपुरा की सदियों पुरानी फड़ चित्रकला को नई पहचान दिलाने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कलाकार शांतिलाल जोशी ने TEDx मंच से भारतीय लोककला का परचम लहराया। जोशी ने बताया कि फड़ चित्रकला लोकदेवताओं, वीर गाथाओं और धार्मिक कथाओं का जीवंत इतिहास है। यह केवल रंगों का संयोजन नहीं, बल्कि कथावाचन और लोकसंस्कृति का सशक्त माध्यम है। महज सात वर्ष की आयु में फड़ परंपरा में दीक्षित हुए जोशी ने इसे पेशा नहीं, साधना माना। उनकी कला ने देश-विदेश में पहचान बनाई है। सूरजकुंड मेला सहित कई अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में उन्होंने भारत की लोककला को गौरव दिलाया। वर्ष 1991 में उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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