कलेक्टर ने राजीविका की दीदीयों का हौंसला बढ़ाया:सरिता, खुशबू और संपत बनीं प्रेरणा, आत्मनिर्भरता से बदली अपनी और समाज की तस्वीर

महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से कलेक्टर कल्पना अग्रवाल द्वारा शुरू किए गए नवाचार ‘दीदीज विद डीएम’ कार्यक्रम के तहत कलेक्टर कक्ष में जिले की राजीविका विभाग से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की दीदियों से दूसरी बार सीधा संवाद किया गया। इस दौरान जिले के विभिन्न उपखंडों से आई महिलाओं ने अपने संघर्ष, परिश्रम और सफलता की प्रेरक कहानियां साझा कीं। संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने बताया कि किस तरह सीमित संसाधनों और साधारण शुरुआत के बावजूद उन्होंने राजीविका से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी और आज वे सफल महिला उद्यमियों के रूप में पहचान बना चुकी हैं। दीदियों की उपलब्धियों ने यह स्पष्ट किया कि अवसर मिलने पर महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बनती हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव में भी अहम भूमिका निभाती हैं। संघर्ष से सफलता तक का सफर उपखंड निवाई की ग्राम पंचायत झिलाई से आई सरिता निराला ने बताया कि वर्ष 2014 में समूह से जुड़ने से पहले वह केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं। वर्ष 2015 में सीएलएफ के माध्यम से उन्हें राजीविका में लेखापाल की जिम्मेदारी मिली। इसके साथ ही वे अन्य महिलाओं को पत्तल-दोने बनाने का प्रशिक्षण भी दे रही हैं। इस कार्य से उनकी वार्षिक आय 2 से 2.50 लाख रुपए तक पहुंच गई है और वे लगातार अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ रही हैं। ब्लॉक टोडारायसिंह की मोर ग्राम पंचायत की परी स्वयं सहायता समूह की सदस्य खुशबू शर्मा ने बताया कि आज वे पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं और किसी पर निर्भर नहीं हैं। वे पी.जी. मॉडल के माध्यम से ग्राम संगठन और सीएलएफ की महिलाओं को जोड़कर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना चाहती हैं। उपखंड मालपुरा की ग्राम पंचायत देशमा की कर्मा स्वयं सहायता समूह की महिला संपत देवी ने बताया कि वे कृषि सखी के कार्य के साथ-साथ राजीविका के प्रोत्साहन से शहद उत्पादन कर रही हैं। गांव स्तर पर ही शहद निर्माण से उन्हें 2 से 3 लाख रुपए की वार्षिक आय हो रही है। कलेक्टर ने सराहा, आगे बढ़ने का दिया मार्गदर्शन कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने ‘दीदीज़ विद डीएम’ कार्यक्रम के तहत दीदियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “राजीविका से जुड़ी दीदियां आज आत्मविश्वास, कौशल और परिश्रम के बल पर सफल उद्यमी बन रही हैं। सरिता निराला, खुशबू शर्मा और संपत देवी जैसी महिलाएं इस बात का प्रमाण हैं कि सरकारी योजनाएं धरातल पर सामाजिक और आर्थिक बदलाव ला रही हैं।” उन्होंने महिलाओं को उत्पाद की गुणवत्ता, ब्रांडिंग, विपणन, नवाचार और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। साथ ही आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन हर कदम पर उनके साथ खड़ा है। राजीविका मार्ट के लिए प्रयास जिला कलेक्टर ने बताया कि राजीविका से जुड़ी महिलाओं को उचित प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में राजीविका मार्ट के निर्माण हेतु भूमि आवंटन और डीएमएफटी से बजट स्वीकृति के प्रयास किए जा रहे हैं। भविष्य में भी राजीविका की महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। संवाद कार्यक्रम के दौरान अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं राजीविका डीपीएम ललित कुमार भी उपस्थित रहे।

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