जिले के पंच गौरव के तहत कृषि उत्पाद सरसों की उपज के विकास एवं उद्यम स्थापना को लेकर जिला मुख्यालय के कृषि ऑडिटोरियम में मंगलवार को जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वाधान में सरसों महोत्सव का आयोजन हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के हर जिले की स्थानीय क्षमताओं को पहचान कर उनका सर्वांगीण विकास करने की अभिनव पहल पंच गौरव कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि किसान खेती के साथ उद्यमिता की ओर बढ़े तो अनकी आय कई गुना बढ़ सकती है। साथ ही कई लोगों को रोजगार भी मिलेगा। उन्होंने कृषि शिक्षा की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेकर सरसों में एंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमिता) को लेकर नवाचार करें। पूंजी और संसाधनों का प्रबंधन कर जिले के आर्थिक विकास को गति दे। इससे पूर्व कलेक्टर ने कृषि ऑडिटोरियम में कृषि से जुड़े व्यवसायों से संबंधित स्टॉल पर जाकर उद्यमियों से संवाद किया। बोले- टोंक सरसों उगाने में पहले स्थान पर कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक विरेन्द्र सिंह सोंलकीं ने कहा कि टोंक जिले में रबी सीजन में 4 लाख 70 हजार हैक्टयर क्षेत्र में बुवाई की जाती है। जिसमें से 3 से 3.25 लाख हैक्टयर मेें सरसों की फसल की बुवाई होती है। यह लगभग 65 प्रतिशत है। प्रदेश में जिला सरसों उत्पादन में प्रथम पायदान पर है। जिले में 6 लाख टन सरसों की पैदावार होती है। जिले से कृषि उपज में प्रति हैक्टयर पैदावार को बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने सरकार की योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि कृषि विभाग सरसों को लेकर नवाचार कर रहा है। किसान इन नवाचारों को अपनाकर खेती की उपज को बढ़ाएं। उन्होंने सरसों की खेती के साथ जिले में मधुमक्खी पालन व्यवसाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कीड़ों से बचाने की विधियां बताई इस दौरान कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर से आये विषय विषेशज्ञ डॉ. मनोहर राम द्वारा सरसों की विभिन्न किस्में एवं उत्पादन तकनीकी के बारे मे जानकारी दी गई। डॉ. मुकेश निटारवाल द्वारा सरसों फसल मे लगने वाले कीट, व्याधियों एवं उनके नियत्रंण की विधियां बताई गई। कृषि विज्ञान केन्द्र वनस्थली के कृषि वैज्ञानिक बंशीधर चौधरी ने किसानों को खेती में फसल व भूमि चक्र अपनाने के सुझाव दिए। उद्यान विभाग के उप निदेशक चन्द्र्रप्रकाश बढ़ाया ने प्रधानमंत्री सुरक्षा खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना व खाद्य प्रसंस्करण के तकनीकी व वित्तीय पहलुओं के बारे में बताया। आत्मा परियोजना के सहायक निदेशक दिनेश बैरवा ने जिले में मधुमक्खी पालन व्यवसाय की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कम लागत अैर कम जमीन से शुरु किया जाने वाला यह लाभकारी व्यवसाय है, जो शहद के साथ मोम, रॉयल जैली और पराग जैसे उत्पाद प्रदान करता है। सरकार इस व्यवसाय के लिए सब्सिडी भी देती है। कार्यक्रम में पीपलू से आए किसान नारायण सांखला ने सरसों की तुड़ी के उपयोग के बारे में बताया। कृषि महाविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त कर रही छात्रा प्रिया, अक्षिता, पाली शर्मा एवं छात्र हर्षित प्रजापत ने बताया कि सरसों महोत्सव से हमें कृषि से जुड़े उद्योग, ग्रामीण रोजगार के बारे में जानकारी मिली है। इस दौरान उन्होंने कृषि से जुड़े अपने विचारों को भी व्यक्त किया। इस दौरान बड़ी संख्या किसान, पशुपालक एवं कृषि महाविद्यालयों से जुड़े छात्र-छात्राए मौजूद रहें।


