नीमच में गुरुवार शाम को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में एग्रीकल्चर प्रोडक्शन कमिश्नर से संबंधित विभागों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर हिमांशु चन्द्रा ने अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए। कलेक्टर ने जिले में सभी पुरानी दुग्ध समितियों और अक्रियाशील सहकारी समितियों को पुर्नजीवित करने, नवीन दुग्ध समितियां गठित करवाने के निर्देश दिए हैं। सहकारी समितियों का एनपीए 5 प्रतिशत से नीचे लाए कलेक्टर ने जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के आर.पी.नागदा को निर्देश दिए कि वे सहकारी समितियों का एनपीए 5 प्रतिशत से नीचे लाने का हर संभव प्रयास करें और जिले की 10 सहकारी समितियों को 0 प्रतिशत एनपीए वाली समिति बनाए। अमृत सरोवरों में भी मत्स्य पालन करवाने के निर्देश मत्स्य विभाग को निर्देशित किया गया कि जिले के ऐसे सभी जलाशय जिनमें मत्स्य पालन किया जा सकता है। उन सभी में मत्स्य पालन करवाएं। उन्होंने जिला पंचायत से सूची प्राप्त कर अमृत सरोवरों में भी मत्स्य पालन करवाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने पशुपालन विभाग के जिले को प्रदत्त पशु इलाज वाहनों का अधिकतम उपयोग करने और अधिकाधिक पशुओं का इन वाहनों के माध्यम से इलाज करवाने के निर्देश भी उप संचालक पशुपालन को दिए। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि पशुपालन विभाग जिले में 100 पशुपालकों को ऋण उपलब्ध करवाकर 100 गाय या भैंस पालन के लिए नए पशु उपलब्ध करवाएं। साथ ही 10 हजार पशुपालकों को केसीसी कार्ड जारी करवाएं। उन्होनें बकरी पालन के प्रकरण तैयार कर, हितग्राहियों को ऋण और अनुदान उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। सोयाबीन खरीदी का भुगतान किया गया बैठक में कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में समर्थन मूल्य पर सोयाबीन उपार्जन के लिए 9 हजार 828 किसानों ने पंजीयन करवाया था। इनमें से 4 हजार 496 किसानों से 9 हजार 600 मैट्रिक टन सोयाबीन का उपार्जन किया जा चूका है। उपार्जित फसल का भुगतान भी कर दिया गया है। जिले में उर्वरक की कोई समस्या नहीं है। वर्तमान में 6021 मैट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। कलेक्टर ने उप संचालक कृषि को सुपर सीडर और अन्य कृषि यंत्र किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराने के लिए लक्ष्य प्रदान करने के लिए शासन को प्रस्ताव भिजवाने के निर्देश भी दिए हैं। बैठक में जिला पंचायत सीईओ अरविंद डामोर, सहायक आयुक्त सहकारिता राजू डाबर सहित कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य, पशुपालन, डेयरी विकास आदि विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।


