कांग्रेस के बागियों ने जेपी नड्डा से की मुलाकात:हिमाचल में बड़ी सियासी हलचल; BJP संगठन चुनाव में समर्थकों की अनदेखी का आरोप

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के बागी एवं वर्तमान में BJP विधायकों ने आज दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात की। सियासी गलियारों में इनकी मुलाकात के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। इससे हिमाचल भाजपा संगठन में भी हलचल पैदा हो गई है और बीजेपी की गुटबाजी सामने आ गई है। जेपी नड्डा से मिलने वालों में धर्मशाला से बीजेपी विधायक सुधीर शर्मा, कुटलैहड़ के पूर्व कांग्रेस विधायक देवेंद्र कुमार भुट्टो, बड़सर के बीजेपी विधायक इंद्रदत्त लखनपाल, हमीरपुर से BJP विधायक आशीष शर्मा, सुजानपुर से पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा और गगरेट के पूर्व कांग्रेस विधायक चैतन्य शर्मा शामिल है। सूत्र बताते हैं कि बीजेपी में शामिल इन नेताओं ने भाजपा के संगठनात्मक चुनाव को लेकर नड्डा से शिकायत की है। दरअसल, हिमाचल प्रदेश में इन दिनों भाजपा के संगठनात्मक चुनाव चल रहे हैं। ज्यादातर ब्लॉक के चुनाव संपन्न हो गए हैं। मगर सुजानपुर, बड़सर के बिझड़ी और हमीरपुर में ब्लॉक चुनाव गुटबाजी की वजह से लटक गए हैं। BJP संगठन में कांग्रेस के बागियों का हो रहा विरोध सूत्रों के अनुसार BJP संगठन में कांग्रेस के पूर्व बागियों का विरोध हो रहा है। इनके विरोध के स्वर विधानसभा उप चुनाव के दौरान भी सामने आए। अब कांग्रेस के बागी और पूर्व निर्दलीय विधायक बीजेपी संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर अपने समर्थकों की ताजपोशी चाह रहे हैं। मगर BJP संगठन में इनका अंदरखाते विरोध हो रहा है। इस वजह से बड़सर के बिझड़ी ब्लॉक के चुनाव में तो खुलकर विवाद सामने आया था। बीते दिनों बिझड़ी मंडल का अध्यक्ष यशवीर पटियाल को घोषित किया गया था। यशवीर पटियाल कांग्रेस के बागी रहे इंद्रदत्त लखनपाल के समर्थक है। इस वजह से यहां का चुनाव रोक दिया गया है। इसी तरह हमीरपुर और सुजानपुर के चुनाव होल्ड कर दिए गए। बीजेपी में समर्थकों को नहीं मिल रहा मान-सम्मान सूत्रों की माने तो BJP में शामिल इन नेताओं ने नड्डा से संगठन में उनके समर्थकों को तवज्जो देने का आग्रह किया है। अभी उनके समर्थकों को पूरा मान-सम्मान नहीं मिल रहा है। बता दें कि अप्रैल 2023 में कांग्रेस के 6 बागी विधायकों सहित तीन निर्दलीय विधायकों ने भाजपा का दामन थामा था। अंदरखाते बीजेपी में उसी दौरान इन नेताओं का विरोध शुरू हो गया था। इन 9 पूर्व विधायकों में से 6 विधानसभा उप चुनाव हार गए। अब इनके समर्थकों को संगठन में स्थान नहीं मिल रहा। इस दौरान इन नेताओं ने हिमाचल सरकार की भी नड्डा से शिकायत की। कहा गया कि केंद्र से जो पैसा आ रहा है, उसे सैलरी और पेंशन देने में डायवर्ट किया जा रहा है।

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