विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंडावा विधायक रीटा चौधरी ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला। विधायक ने प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत और झुंझुनू के पूर्व जिला कलेक्टर रामवतार मीणा पर गंभीर आरोप लगाते हुए सदन में सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि मंडावा की ऐतिहासिक हवेलियों पर कब्जे करवाने में सत्ता पक्ष के लोग लिप्त हैं। जमीन विवाद और कब्जों की शिकायत के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और मुख्यमंत्री आवास (CMR) में कई बार फोन किए। शिकायत दर्ज कराने के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने का समय तक नहीं दिया गया। ‘फोन तक नहीं उठाते मंत्रीजी’ विधायक रीटा चौधरी ने प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत को लेकर कहा कि वे मंडावा क्षेत्र की कलात्मक और ऐतिहासिक हवेलियों पर अवैध कब्जे करवाने का काम कर रहे हैं। विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्षेत्र की विरासत को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जब एक निर्वाचित विधायक समस्या को लेकर मंत्री को फोन करता है, तो वे फोन उठाना भी उचित नहीं समझते। जनता की समस्याओं की सुनवाई के बजाय भू-माफियाओं को संरक्षण दिया जा रहा है। बिसाऊ जमीन विवाद का खुलासा सदन में रीटा चौधरी ने झुंझुनू के पूर्व कलेक्टर रामवतार मीणा के कार्यकाल की एक कथित धांधली का पर्दाफाश किया। उन्होंने बताया कि बिसाऊ में पिछले 60 वर्षों से एक अल्पसंख्यक परिवार जमीन पर काबिज था और खेती कर रहा था। कुछ राजनीतिक और रसूखदार लोगों के दबाव में आकर कलेक्टर उस जमीन का नामांतरण (म्यूटेशन) दूसरे के नाम करवाना चाहते थे, लेकिन तत्कालीन तहसीलदार ने गलत काम करने से साफ़ मना कर दिया। हैरान करने वाली बात यह है कि तहसीलदार के इनकार करने पर कलेक्टर ने उन्हें वहां से हटा दिया और कलेक्ट्रेट के एक बाबू को दो दिन के लिए तहसीलदार का चार्ज देकर बिसाऊ भेज दिया। उस बाबू से आनन-फानन में वह गलत नामांतरण करवाया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) पर भी साधा निशाना मुख्यमंत्री द्वारा विधायकों के फोन तुरंत उठाने के दावे पर रीटा चौधरी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि इस जमीन विवाद और कब्जों की शिकायत के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और मुख्यमंत्री आवास (CMR) में कई बार फोन किए। शिकायत दर्ज कराने के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने का समय तक नहीं दिया गया। विधायक ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सदन में कह रहे हैं कि वे सबका फोन उठाते हैं, लेकिन हकीकत में मंडावा की समस्याओं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।


