कागज़ का दौर खत्म, मोबाइल ऐप व पोर्टल से जनगणना

भास्कर न्यूज| महासमुंद भारत की आगामी जनगणना को लेकर तैयारियां अब धरातल पर उतरने लगी हैं। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए, महासमुंद जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित दो दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जनगणना 2027 की बारीकियों और डिजिटल तकनीकी से अधिकारियों को लैस करना था। प्रशिक्षण के दौरान सहायक निदेशक (जनगणना कार्य निदेशालय रायपुर) रश्मिता स्वाईं ने एक ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा की। उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल आधारित जनगणना होगी। अब कागजी फॉर्म के बजाय डेटा संकलन का पूरा कार्य मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल सीएमएमएस (सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम) के माध्यम से किया जाएगा। इस डिजिटल बदलाव से न केवल डेटा की गणना त्वरित होगी, बल्कि प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता भी बढ़ेगी। प्रशिक्षण में बताया गया कि इस बार आम नागरिकों को स्व-गणना की सुविधा भी दी जाएगी। इससे जनता का तंत्र पर विश्वास बढ़ेगा और लोग सीधे इस राष्ट्रीय कार्य में भागीदारी कर सकेंगे। सांख्यिकी अन्वेषक देवांशु कुमार शाक्य ने सीएमएमएस पोर्टल के तकनीकी पहलुओं और मैदानी स्तर पर आने वाली संभावित चुनौतियों के समाधान पर विस्तृत जानकारी साझा की। बैठक में प्रथम चरण के कार्यों की समयसीमा निर्धारित की गई है। प्रथम चरण की अवधि 1 मई से 31 मई 2026 तक रहेगी। मुख्य कार्य मकान सूचीकरण और मकानों की गणना है। यह अभियान छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों, 252 तहसीलों और 19,978 गांवों में एक साथ संचालित होगा। सहायक निदेशक रश्मिता स्वाईं ने कहा कि यह जनगणना केवल जनसंख्या के आंकड़े जुटाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विकसित और आत्मनिर्भर भारत 2047 की नींव रखने वाला दस्तावेज सिद्ध होगा। इस मौके पर अपर कलेक्टर सचिन भुतड़ा, रवि कुमार साहू और जिला जनगणना अधिकारी मनोज खाण्डे व प्रशिक्षण में सभी अनुभागों के एसडीएम, तहसीलदार (चार्ज अधिकारी), मुख्य नगरपालिका अधिकारी और सांख्यिकी विभाग के विशेषज्ञ उपस्थित थे।

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