दुर्ग के दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सहायक प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक और प्राध्यापक पदों की भर्ती में आरक्षण नियमों और रोस्टर प्रणाली के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में अनुसूचित जनजाति आयोग, छत्तीसगढ़ को सामूहिक शिकायत भेजकर पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है। शिकायत में कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने 13 जुलाई 2023 को एक भर्ती विज्ञापन जारी किया था। इसके करीब दो साल बाद 16 सितंबर 2025 को उसे निरस्त कर दिया गया। आवेदन लेने के बाद इतने लंबे समय तक प्रक्रिया लंबित रहने और फिर अचानक निरस्त करने पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि विज्ञापन निरस्त करने के लिए बनी समिति की कार्यप्रणाली और उसमें शामिल लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। 42 में से 7 पदों पर ही नियुक्ति
मामले का दूसरा अहम पहलू बैकलॉग पदों से जुड़ा है। 5 मार्च 2019 को जारी एक विज्ञापन में 42 बैकलॉग पद निकाले गए थे। इनमें से केवल 7 पदों पर ही नियुक्ति हुई, जबकि 35 पद अब भी खाली बताए जा रहे हैं। नियमों के मुताबिक पहले बैकलॉग पदों को भरना जरूरी होता है। आरोप है कि शेष बैकलॉग पदों को भरे बिना ही 11 फरवरी 2026 को नए पदों के लिए ताजा विज्ञापन जारी कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह कदम आरक्षण रोस्टर के क्रम का उल्लंघन हो सकता है। आरक्षण नियमों का नहीं किया गया पालन
रोस्टर निर्धारण को लेकर भी सवाल उठे हैं। शिकायत में कहा गया है कि विभागवार सीटों और आरक्षण का निर्धारण पूरी समिति की औपचारिक बैठक में नहीं किया गया। साथ ही रोस्टर समिति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिला प्रतिनिधित्व का पूरा ध्यान नहीं रखा गया। इससे आरक्षित वर्गों के हिस्से के पद प्रभावित हो सकते हैं। यह भी कहा गया है कि Livestock Farm Complex और Veterinary Clinical Complex प्रशासनिक रूप से एक इकाई के रूप में काम करते हैं, लेकिन पदों के विज्ञापन में रोस्टर को अलग-अलग लागू किया गया। इस पर भी नियमों के अनुसार जांच की मांग की गई है। साथ ही रोस्टर रजिस्टर और 100 या 200 बिंदु रोस्टर के सही पालन की स्थिति स्पष्ट करने की बात कही गई है। तय आयु सीमा के बाद भी काम
विभागवार पदों के बंटवारे पर भी सवाल हैं। शिकायत में कहा गया है कि क्या पदों का वितरण वास्तविक जरूरत के अनुसार किया गया है या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। विश्वविद्यालय की सेवा विनियम 2013 के अनुसार प्रशासनिक पदों के लिए सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है। यदि रोस्टर समिति के अध्यक्ष इस आयु सीमा के बाद भी पद पर कार्य कर रहे हैं तो इसकी वैधता की भी जांच जरूरी बताई गई है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि वर्तमान भर्ती प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए। साथ ही रोस्टर रजिस्टर, समिति की कार्यवाही और विज्ञापन निरस्तीकरण से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। उनका कहना है कि पहले शेष बैकलॉग पदों को नियमानुसार भरा जाए, उसके बाद ही नए पदों के लिए भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाए।


