फैक्ट्री में धमाका होने के बाद चारों तरफ धुआं-धुआं हो गया। मैं कांच तोड़कर बाहर निकला। इस दौरान हमारे दो साथी जलते हुए बाहर आए। बाकी 7 लोग अंदर ही जिंदा जल गए। हमारा जब भी पेमेंट को लेकर विवाद होता तोफैक्ट्री मालिक हेमंत शर्मा कहता था कि कहीं भी शिकायत कर लो, कुछ नहीं होगा… मेरा भाई पुलिस में है। ये कहना है 16 फरवरी को भिवाड़ी में अवैध पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट से बचने वाले नितेश कुमार पासवान का। नितेश फैक्ट्री का कांच तोड़कर बाहर निकला था, जिससे उसकी जान बच गई। नितेश ने बताया कि धमाके वाले दिन फैक्ट्री में 700 पेटी तैयार माल और 4200 पेटी जितना कच्चा माल रखा था। दीवार के कारण मैं बच गया-नितेश
नितेश ने बताया-मैं सुबह 9 बजे कंपनी में गया था। इसके बाद मशीन पर काम करने लगा। थोड़ी देर बाद ही जोरदार धमाका हुआ। कुछ समझ पाते उससे पहले ही चारों ओर धुंआ-धुआं हो गया। मैं गेट से निकलने की बजाय कांच तोड़कर बाहर निकला। मेरे पीछे मेरे ही जिले का एक और लड़का बाहर निकल आया। जहां धमका हुआ, उस जगह और मेरे बीच में दीवार थी। उसके ऊपर कांच लगे थे। इसकी वजह से मैं बच गया। मेरे सामने दो लोग जलती हालत में बाहर आए। जो अंदर 7 लोग फंस गए थे, वह जलकर मर गए। फैक्ट्री के दरवाजे बंद कर देते थे, जिससे हम बाहर ना जा सकें
श्रमिक ने बताया कि हमें कपड़ा फैक्ट्री में काम दिलाने के बहाने बिहार से भिवाड़ी लाया गया था। मैनेजर ने अच्छी मजदूरी और सुविधाओं का लालच दिया था। लेकिन फैक्ट्री पहुंचे तो पटाखों के काम में लगा दिया। काम के दौरान फैक्ट्री के दरवाजे बंद कर दिए जाते थे। इस दौरान कोई भी फैक्ट्री के बाहर नहीं जा सकता था। दिन का खाना भी वहीं बनाकर खिलाया जाता था। रोजाना 40 पेटी माल तैयार होता था
नितेश ने बताया- कंपनी में रोजाना 8 से 10 घंटे काम कराया जाता था। हर दिन करीब 40 पेटियां तैयार माल बनाया जाता था। जिस दिन हादसा हुआ, उस दिन लगभग 700 पेटी तैयार माल और 4,200 पेटी के बराबर कच्चा माल फैक्ट्री में था। तैयार माल को 5-7 दिन में गोदाम में शिफ्ट करते थे
फैक्ट्री में तैयार होने वाले माल को 5 से 7 दिनों के भीतर गोदाम में शिफ्ट किया जाता था। गोदाम से हर रोज 3 से 4 छोटी बंद बॉडी गाड़ियों के जरिए माल की सप्लाई की जाती थी। तैयार माल दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद, एनसीआर समेत अन्य इलाकों में भेजा जा रहा था। सील की गई फैक्ट्री में तैयार होता था दोगुना माल
नितेश ने दावा किया कि जिस दूसरी फैक्ट्री को घटना के अगले दिन सील किया गया, वहां 50 से 60 बोरी बारूद का स्टॉक रखा हुआ था। इस फैक्ट्री में ब्लास्ट वाली फैक्ट्री से दोगुना माल तैयार किया जाता था। दोनों फैक्ट्रियां एक ही मालिक की हैं। डीएसपी बोले-बरामद माल की जांच चल रही
हालांकि मामले की जांच कर रहे डीएसपी शिवराज सिंह ने कहा कि सील की गई कंपनी में बरामद सामग्री की जांच जारी है। प्राथमिक जांच में अभी तक इतनी बड़ी मात्रा में बारूद मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। …. भिवाड़ी विस्फोट कांड की ये खबरें भी पढ़िए… राजस्थान में अवैध पटाखा फैक्ट्री में धमाका,7 लोग जिंदा जले:4 गंभीर झुलसे, पॉलीथीन में ले जाने पड़े शव; मैनेजर हिरासत में, फैक्ट्री सील राजस्थान के भिवाड़ी में 16 फरवरी को केमिकल फैक्ट्री में अचानक तेज धमाका हुआ था। इसमें 7 मजदूर जिंदा जल गए, जबकि 4 गंभीर रूप से झुलस गए थे। शव कंकाल बन गए थे। (पढ़ें पूरी खबर) फैक्ट्री में धमाके के साथ लगी आग, ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो, लोगों के कंकाल बचे राजस्थान के भिवाड़ी की केमिकल फैक्ट्री में धमाके से 7 लोग जिंदा जल गए थे। आग इतनी भीषण थी कि इसकी लपटें दूर से ही दिखाई दे रही थीं। (पढ़ें पूरी खबर) पटाखा फैक्ट्री में 7 लोग जिंदा जले थे, मालिक-मैनेजर गिरफ्तार:प्लॉट मालिक के घर पहुंची पुलिस, एक आरोपी भिवाड़ी DST के हेड कॉन्स्टेबल का भाई राजस्थान के भिवाड़ी के अवैध पटाखा फैक्ट्री के मालिक हेमंत कुमार शर्मा और मैनेजर अभिनंदन को गिरफ्तार कर लिया गया। हेमंत भिवाड़ी पुलिस की DST टीम में तैनात हेड कॉन्स्टेबल योगेश कुमार शर्मा का भाई है। (पढ़ें पूरी खबर)


