जयपुर के कावंटिया हॉस्पिटल में एक दुर्लभ सिस्ट का आज ऑपरेशन किया। मेडिकल साइंस में ‘’एक्स्ट्रा हेपेटिक हाइडेटिड सिस्ट” नाम से पहचानी जाने वाली ये सिस्टम अक्सर बहुत कम मरीजों में देखने को मिलती है। ये सिस्ट अक्सर जानवर (श्वान या गाय) के संपर्क से फैलती है। इसमें जानवर से निकला परजीवी संक्रमण मनुष्य के शरीर में प्रवेश करने के बाद अक्सर लिवर या फेफड़े पर एक लिक्विड (तरल) थैली के तौर पर सिस्ट बना लेता है। लेकिन इस केस में ये सिस्ट यूट्रस (गर्भाश्य) और यूरेटर (किडनी से यूरिन ब्लडर को जोड़ने वाली धमनी) से चिपकी मिली, जो दुर्लभ मामला है। सीनियर सर्जन डॉ. पंकज पोरवाल ने बताया- कोटा की रहने वाली 35 साल की महिला में ये केस मिला। उन्होंने बताया, ग्रामीण एरिया में रहने वाली ये महिला पिछले कई महीने से इस सिस्ट के कारण परेशान थी। उसे बार-बार उल्टी आने के साथ पेट में दर्द होने, पेट फूलने और पेशाब में परेशानी की शिकायत थी। कोटा में भी हॉस्पिटल में लम्बे समय तक इलाज करवाया, लेकिन बीमारी ट्रेस नहीं होने के कारण इलाज सही नहीं हुआ, जिसके बाद वे यहां आई। जांच के बाद बीमारी पकड़ी डॉ. पोरवाल ने बताया- मरीज के पेट की सोनोग्राफी, सीटी स्कैन समेत अन्य जांच करवाने के बाद सिस्ट ट्रेस हुई और अन्य दूसरी जांच करवाने के बाद पता चला कि ये ‘’एक्स्ट्रा हेपेटिक हाइडेटिड सिस्ट” है, जो करीब 15×12 सेंटीमीटर की है। इसके बाद हमने कुछ दिन महिला को दवाईयां देकर उसकी स्थिति को स्टेबल करने के बाद कल भर्ती किया और आज उसकी सर्जरी करके सिस्ट को निकाला। इस सर्जरी में डॉ. डी.पी. मौर्य, डॉ. सुनील शर्मा, डॉ. हेमेन्द्र पाटीदार, डॉ. महेंद्र और डॉ. ईशान का योगदान रहा। साथ ही एनेस्थीसिया टीम में डॉ. प्रशांत और उनकी टीम का सहयोग रहा। सिस्ट फटने का सबसे बड़ा खतरा डॉक्टर ने बताया- अक्सर इस तरह की सिस्ट निकालने में सबसे बड़ा खतरा उसके फटने का रहता है। अगर सिस्ट ऑपरेशन के दौरान फट जाए तो शरीर के अंदर गंभीर एलर्जिक रिएक्शन (एनाफिलेक्सिस) या संक्रमण फैल जाता है, जिससे मरीज के लिए खतरा और बढ़ जाता है। इस केस में चूंकि सिस्ट ऐसी जगह फंसी थी, जहां से उसे निकालना चुनौती था। लेकिन हमारी टीम ने बहुत सावधानी से करीब डेढ़ घंटे की सर्जरी के बाद उसे बाहर निकाला।


