किरोड़ी ने ‘तोप’ से दिया ‘ताबूत’ का जवाब:शादी में हनुमान बेनीवाल-नरेश मीणा का ‘पॉलिटिकल शो’; नेताजी का पेड़ भी काटा

नमस्कार राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के माननीय ने ‘फूट’ डालने की भरसक कोशिश की, लेकिन किरोड़ीजी ने ‘ताबूत’ का जवाब ‘तोप’ से दिया। सवाई माधोपुर में सड़क चौड़ी करने के लिए दर्जनों हरे पेड़ काट दिए गए। कुछ पेड़ ऐसे भी कट गए, जो नेताजी के पिताजी ने लगाए थे। जयपुर में सांसद हनुमान बेनीवाल और बीएसएस प्रमुख नरेश मीणा शादी समारोह में मिले। फिर समारोह राजनीतिक हो गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. मेरी प्रशंसा ऐसी-तैसी करने के लिए की है या भलाई करने के लिए अंग्रेजों ने ‘फूट डालो-राज करो’ के नियम से भारत पर राज किया। राज करने का यह पुराना नियम विपक्ष के माननीय नेताजी को भी याद था। वे सदन में अपनी सीट पर खड़े हुए और अपनी याददाश्त के अनुसार सत्ता पक्ष के प्रमुख नेता और मंत्रीजी की तारीफों के पुल बांधने शुरू किए। उन्होंने कहा- मुझे दुख है कि उन्हें अपनी हैसियत और मेहनत के अनुसार पद नहीं दिया। उन्होंने आपकी पार्टी के लिए क्या नहीं किया। उन्हें सीएम होना चाहिए था। सीएम नहीं तो डिप्टी सीएम होना चाहिए था। डिप्टी सीएम भी नहीं तो गृह मंत्री होना चाहिए था। लेकिन उन्हें कृषि मंत्री बना दिया। इसमें भी उनके विभाग के टुकड़े कर दिए। उन्हें साजिश की बू आई। वे बोले- मुझे लगता है कि उनके खिलाफ साजिश की गई है। पूर्वी राजस्थान के लोगों को उन्होंने ही आपकी पार्टी का नाम लेना सिखाया। उनके साथ अन्याय हुआ। वे लगभग सुबकते हुए बोले- आपकी पार्टी पर जब भी संकट आया तो वही थे जिन्होंने संकट से निकाला। जब संकट से निकालने की बात आती है तो आपकी पार्टी उन्हें आगे कर देती है। अधिकार देने की बारी आती है तो उन्हें कतार में सबसे पीछे खड़ा कर दिया जाता है। उन्होंने गीता का उपदेश देने के हाव-भाव से तर्जनी उठाकर कहा- वे मामूली आदमी नहीं हैं। देखना, आपकी पार्टी के ताबूत में आखिरी कील वही ठोकेंगे। संयोग से जब वे मंत्रीजी के समर्थन में बोल रहे थे और उनकी पार्टी में फूड डालने की भरपूर कोशिश कर रहे थे, तब मंत्री महोदय सदन में नहीं थे। बाद में मंत्रीजी सदन में आए। उनके दिमाग में माननीय नेता की ओर से की गई ‘बड़ाई’ घूम रही थी। वे बोले- मैं समझ नहीं पा रहा कि बड़ाई मेरी ऐसी-तैसी करने के लिए की है या भलाई करने के लिए। फिर उन्होंने ताबूत का जवाब तोप से दिया- सपने देख लो। मैं अपना दल और विचारधारा छोड़कर जा नहीं सकता। चाहे मुझे तोप के गोले से उड़ा दो। तोप का गोला ‘फूट डालने वाले नियम’ पर जाकर गिरा और ‘बड़ाई’ की हवा निकल गई। 2. मेरे पिताजी का लगाया पेड़ काट दिया.. सोलर से ऊर्जा पैदा कर दूसरे राज्यों को बिजली सप्लाई करने के रास्ते में खेजड़ी आ गई थी। जोरदार आंदोलन चला। सरकार को कहना पड़ा कि प्रदेश में कहीं भी खेजड़ी नहीं कटेगी। लेकिन विकास के नाम पर हरे-भरे दूसरे पेड़ों की बली का दौर सवाई माधोपुर में चला। दावा है कि सड़क को चौड़ा करने के नाम पर 150 पेड़ काट दिए गए। पेड़ों को कटता देख लोग सड़कों पर उतर आए। जनता का गुस्सा देख आरियां भी थम गईं। सोशल मीडिया पर माहौल बन गया। शहर में एक जामुन के पेड़ के पास 75 साल के एक बुजुर्ग खड़े हो-हल्ला मचा रहे थे। जामुन के पेड़ पर भी क्रॉस का निशान लगा था। बुजुर्ग का नाम सोहन लाल नरूका। पत्रकार ने पूछा- क्या आपका पेड़ भी काट दिया। बुजुर्ग आपे में नहीं रहे। बोले- बताइए, कैसा अन्याय है। मेरे पिताजी ने पेड़ लगाए थे। सब काट डाले। पूछा भी नहीं। मैं सत्ता वाली पार्टी का पूर्व जिलाध्यक्ष हूं। मैंने हमारे नेताजी को फोन लगाए, लेकिन मेरा फोन उठाया ही नहीं। ये क्या मिलीभगत है। हमारे नेता हमारा ही फोन नहीं उठाते। लोगों ने पेड़ बचने की उम्मीद पार्टी से छोड़ दी। जनहित याचिका लेकर कोर्ट की तरफ भागे। जिस दिन सुनवाई होनी थी, उसी दिन सुनवाई करने वाले स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष महोदय छुट्‌टी पर चले गए। 3. ऐसी शादी, जहां फूफा जी को किसी ने नहीं पूछा फूफाजी ने मंडली में हुक्का गुड़गुड़ाते हुए कहा- पता है शादी में सांसद महोदय आ रहे हैं। मंडली की आंखें फैल गई हैं ? फूफाजी ने आगे कहा- और तो और वे भी आ रहे हैं जिन्होंने फलां मौके पर फलां अधिकारी को थप्पड़ मारा था। मंडली की आंखें सिकुड़ गई हैं? आखिर शादी का वह मंजर उपस्थित हुआ जब स्टेज पर दूल्हा और दुल्हन अवतरित होते हैं। इसी दौरान बारात के आने से पहले घराती जल्दी-जल्दी जीमने लगते हैं और बाराती तोरण में देरी को अपना अधिकार समझते हैं। सांसद महोदय और जोशीले नेताजी स्टेज पर पहुंच गए। वे जाकर सोफे पर जम गए। दूल्हा-दुल्हन का अता-पता नहीं। न कोई घराती रहा और न कोई बाराती। सब लोग समर्थक निकल आए। जिंदाबाद के नारे लगने लगे। शादी का मंच राजनीति का मंच बन गया। सांसद महोदय को भी जोश आ गया। डीजे वाले से माइक लेकर वहां स्पीकर का इंतजाम किया गया। मंच से सांसद महोदय बोले- हमें राजनीतिक रूप से मजबूत होना है। अगर जाट के साथ मीणा, एससी और मुस्लिम एक हो जाएं तो एक लाख 40 हजार वोट आएंगे। इसके बाद उन्होंने नरेश मीणा को आगे किया- नरेश मेरा छोटा भाई है। ‘डॉक्टर साहब’ की रिटायरमेंट की उम्र हो गई है। अब नरेश मीणा पूर्वी-दक्षिणी राजस्थान के नए नेता बन रहे हैं। हम मिलकर सत्ता पर कब्जा करेंगे। यह पहली ऐसी शादी थी जिसमें फूफाजी को कोई नहीं पूछ रहा था। वे भी भीड़ में खड़े होकर ‘नेताजी जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे। 4. चलते-चलते.. महानगर में दो अधेड़ दोस्तों की चर्चा चल रही थी। एक बोला- घुटनों में बड़ा दर्द रहने लगा है। कोई अच्छा डॉक्टर हो तो बताना। दूसरे दोस्त ने कहा- हमें तो कभी घुटनों में दर्द की शिकायत नहीं रही। हम तो उस इलाके से आते हैं जहां कन्हैया दंगल होता है। पहले वाला दोस्त चौंका- कन्हैया दंगल? यह क्या है और इसमें क्या होता है, और इसका क्या महात्म्य है? दोनों शुकदेव और परीक्षित की स्थिति में आ गए। शुकदेव जी ने कहा- हमारे राजस्थान के करौली, दौसा, सवाई माधोपुर, अलवर और भरतपुर आदि जिलों में लोकगायन और लोकनृत्य की यह अनोखी प्रतियोगिता है। इसमें कई मंडलियों के बीच मुकाबला होता है। नौबत, ढप, मंजीरे और चिमटे बजाकर पौराणिक कथाएं सुनाई जाती हैं। इस दौरान जोश इतना बढ़ जाता है कि तुम्हारी मेरी उम्र के लोग संगीत की तान पर बल्लियों उछलते हैं। इसके बाद दोनों दोस्तों ने ट्रेन पकड़ी और करौली के टोडाभीम पहुंच गए। जहां गांव के चौक पर घुटनों का शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा था। इनपुट सहयोग- नरेंद्र भारद्वाज (सवाई माधोपुर), पुष्पेंद्र नाथावत (चाकसू), राघवेंद्र गुर्जर (दौसा)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह 7 बजे मुलाकात होगी..

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