किशनगढ़बास में ग्रामीणों को बताए बाल विवाह के दुष्परिणाम:विधिक जागरूकता शिविर में बताई लड़कियों की शादी की सही उम्र, लोगों को किया जागरूक

खैरथल-तिजारा जिले के किशनगढ़बास में बाल विवाह निषेध अभियान के तहत एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर नालसा आशा स्कीम के अंतर्गत 100 दिवसीय अभियान का हिस्सा था, जिसे पीएलवी सूरजभान कछवाहा और गुलाब शर्मा ने नगर पालिका किशनगढ़बास के ग्राम गंज स्थित मनरेगा कार्य स्थल (उप कारागृह परिसर) में आयोजित किया। लड़कियों की शादी की सही उम्र की जानकारी दी राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण खैरथल-तिजारा के अध्यक्ष शैलेंद्र व्यास के आदेश तथा सचिव रणवीर सिंह के निर्देश पर यह शिविर आयोजित हुआ। इसमें बाल विवाह निषेध अधिनियम-2006 के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। बाल विवाह से बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को खतरा शिविर में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए बताया गया कि बाल विवाह केवल कानूनी अपराध ही नहीं, बल्कि यह बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और उनके भविष्य के लिए भी गंभीर खतरा है। वक्ताओं ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत दंडनीय प्रावधानों पर प्रकाश डाला और जोर दिया कि समाज की जागरूकता व सामूहिक प्रयासों से ही इस कुरीति पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। ग्रामीणों ने बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया कार्यक्रम के दौरान उपस्थित नागरिकों से अपील की गई कि वे बाल विवाह से संबंधित किसी भी जानकारी को तुरंत प्रशासन या संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाएं। इस सामाजिक कुरीति को समाप्त करने में सहयोग करने का आह्वान किया गया। शिविर में स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई और सभी ने बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया।

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