झुंझुनूं में एक किसान को इच्छा मृत्यु का ऐलान करना भारी पड़ गया। किसान की ओर से इच्छा मृत्यु की घोषणा के बाद मौके पर लगाए गए पुलिस जाब्ते का खर्चा किसान से मांगा गया है। इस संबंध में झुंझुनूं एसपी शरद चौधरी ने आदेश जारी कर गोठड़ा हाल देवगांव निवासी किसान विद्याधर यादव पुत्र नत्थूराम यादव से 9 लाख 99 हजार 577 रूपए वसूलने के आदेश दिए हैं। एसपी ने पत्र में लिखा है कि 11 दिसंबर 2024 को गोठडा में किसान विद्याधर यादव को आत्मदाह करने की घोषणा की थी, जिसे रोकने के लिए मौके पर जाब्ता तैनात किया गया था। एसपी शरद चौधरी ने बताया कि गोठडा में स्थित सीमेंट फैक्ट्री के पास किसान को आत्मदाह से बचाने के लिए पुलिस अधिकारियों समेत 99 पुलिसकर्मी का जाब्ता लगाया गया था। इसमें सरकारी वाहनों का उपयोग भी किया गया। किसान की निजी सुरक्षा के लिए लगाए जाब्ते पर सरकारी कोष से 9 लाख 99 हजार 577 रूपए खर्च हुए है। एसपी ने 17 दिसंबर 2024 को आदेश जारी कर किसान से वसूली के लिए कहा है। 7 दिन में पैसा जमा कराने का आदेश आदेश में कहा गया है कि ये 9 लाख 91 हजार 577 रूपए सात दिन के अंदर पुलिस अधीक्षक कार्यालय की लेखा में जमा करवाए जाए। किसान की निजी सुरक्षा के लिए एक एएसपी, दो डीएसपी, दो पुलिस निरीक्षक, 3 उप निरीक्षक, 6 सहायक उप निरीक्षक, 18 हैड कॉन्स्टेबल और 67 कॉन्स्टेबल नियुक्त किए गए। एसपी शरद चौधरी ने बताया कि किसान की आत्मदाह की घोषणा के बाद उसकी निजी सुरक्षा के लिए पुलिस जाब्ता लगाया गया था। इसलिए ये वसूली के आदेश दिए गए है। किसान को ये पैसे 7 दिन में जमा करवाने होंगे। बता दें कि गोठड़ा हाल देवगांव निवासी किसान विद्याधर यादव पुत्र नत्थूराम यादव ने गोठड़ा में स्थित सीमेंट कंपनी पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए 11 दिसंबर को कंपनी के गेट के सामने आत्मदाह का प्रयास किया था। किसान के परिवार ने पहले तो लकड़ियों की चिता बनाई और उस पर बैठ गए। मौके पर पहुंचे पुलिस- प्रशासन ने परिवार के लोगों को वहां से उठाया और किसान को हिरासत में ले लिया था। राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर मांगी थी इच्छा मृत्यु इससे पहले किसान विद्याधर यादव ने नवलगढ़ एसडीएम और झुंझुनू कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर इच्छा मृत्यु की मांग की थी। ज्ञापन में न्याय नहीं होने पर आत्मदाह की चेतावनी दी थी। परिवार ने सीमेंट कंपनी के अधिकारियों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। किसान विद्याधर यादव आरोप लगाया था कि उसकी गोठड़ा गांव में सीमेंट फैक्ट्री के माइनिंग क्षेत्र में जमीन और मकान है। सीमेंट कंपनी व प्रशासन के अधिकारियों द्वारा उनके परिवार को बंधक बनाकर उनके स्थाई आवास को अतिक्रमण के नाम पर तोड़ दिया गया था। सीमेंट कंपनी द्वारा उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया गया। लगातार विरोध करने पर कंपनी की ओर से उन्हें धमकियां दी जा रही थी। लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाते लगाते उनका परिवार न्याय प्राप्ति के लिए थक चुका है। अब ऐसे में पूरा परिवार इच्छा मृत्यु चाहता है। कंपनी ने किसान पर लगाया था आरोप सीमेंट कंपनी ने खनन क्षेत्र में आने वाले विद्याधर और सुखदेव के घर को सुरक्षा कारणों से हटाने की आवश्यकता जताई थी। सीमेंट कंपनी के यूनिट हैड एचसी गुप्ता ने बताया कि था कि वे सीमेंट कंपनी समझौते के अनुसार मुआवजा राशि देने के लिए तैयार थे, लेकिन किसान मुआवजा राशि लेने को तैयार नहीं है, वे बार- बार डिमांड बदल रहा था। ये था विवाद गोठड़ा गांव में खसरा नंबर 1225, 1226, 1243 और 1241 की 3.118 हेक्टेयर भूमि सीमेंट कंपनी के खनन क्षेत्र में आती है। इस भूमि में से 1/3 हिस्सा विद्याधर यादव और उसके भाई सुखदेव यादव का है। इसके लिए राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 89 के तहत अतिरिक्त जिला कलेक्टर झुंझुनूं ने पांच जनवरी 2021 को निर्णय पारित किया, जिसमें भूमि का मुआवजा 22,47,773 रुपए प्रति बीघा तय किया गया था। बाद में 13 अक्टूबर 2023 को किसानों और सीमेंट कंपनी के बीच समझौता हुआ, जिसमें मुआवजा राशि को बढ़ाकर 26 लाख रुपए प्रति बीघा कर दिया गया। इसके अलावा, निर्माण लागत और अन्य मुआवजा मिलाकर कुल राशि 3 करोड़ 5 लाख 10 हजार 909 रुपए तय की गई थी।


