समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए मऊगंज जिले में 29 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। 28 केंद्रों पर खरीदी शुरू हो गई है। वहीं एक बचे खैरा खरीदी केंद्र में कुछ तकनीकी कारणों से अभी खरीदी शुरू नहीं हो पाई है। जिले में धान बेचने के लिए 18 हजार 733 किसानों ने पंजीयन कराया है। 11 दिसंबर तक 1 हजार 550 किसान धान बेच चुके हैं। इन किसानों से सरकार ने अब तक 1 लाख 20 हजार क्विंटल धान की खरीदी है। खरीदी 4 दिसंबर को शुरू हुई थी। यह 20 जनवरी तक चलेगी। निर्धारित माप से अधिक तौल की जा रही धान एक किसान ने नाम न पब्लिश करने की शर्त पर बताया कि तौल के लिए हमें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। लेकिन व्यापारियों की तुलाई तुरंत हो रही है। ये सब प्रभारी और उनके सहयोगियों के जरिए किया जा रहा है। किसानों से प्रति बोरी 500 ग्राम से लेकर 1 किलो तक ज्यादा धान ली जा रही है। बहुती में 41 किलो 200 ग्राम से लेकर 500 ग्राम तक अधिक धान की तौल की जा रही है। समझौता शुल्क के नाम पर लगाए जाते हैं नंबर एक किसान ने बताया कि समझौता शुल्क के दम पर व्यापारी पहुंचते ही अपनी धान आराम से बिक्री कर लेते हैं। वैसे तो खरीदी केंद्रों में मात्र किसानों की धान खरीदने का नियम है। लेकिन ऐसा कोई भी खरीदी केंद्र नहीं है, जहां प्रतिदिन व्यापारियों की धान ना पहुंचती हो। यहां तक की खरीदी केंद्र प्रभारी भी जानते हैं कि यह धान व्यापारी की है। खरीदी केंद्रों में बैठकर यदि तहकीकात की जाए तो कुछ ऐसे व्यापारी हैं, जो खरीदी प्रारंभ से लेकर खरीदी के अंतिम दिन तक प्रतिदिन धान बिक्री करने आते हैं। फिर भी आज तक इन व्यापारियों को जिम्मेदार अमला ना तो पकड़ पाया और ना ही इनके द्वारा बेची जा रही धान पर रोक लगा पाया है। क्योंकि यह व्यापारी कुछ ऐसे चिह्नित किसानों के नाम पर धान की बिक्री करते हैं। जिनके खेतों में धान या तो बोई नहीं जाती या बोई गई है तो उत्पादन ना के बराबर है और धान बिक्री करने का रजिस्ट्रेशन सैकड़ों क्विंटल का होता है और इसका फायदा बिचौलिए उठते हैं। वहीं समझौता शुल्क के नाम पर 100-50 रुपए लेकर तौल के लिए पहले बुला लिया जाता है। खरीदी सेंटर पर न छाया, पार्किंग व्यवस्था खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था से ग्रामीण परेशान हैं। कई केंद्रों पर छाया के इंतजाम नहीं है। इससे किसानों को घंटों धूप में खड़ा रहना पड़ रहा है। वहीं पार्किंग व्यवस्था न होने से सड़क पर ही ग्रामीणों वाहन पार्क करने पड़ रहे हैं। इससे लोगों को अपनी बारी का इंतजार करते हुए कई दिन सड़क पर ही गुजारने पड़ रहे हैं। साथ ही कई सेंटर पर कामगार न होने से तुलाई कार्य भी प्रभावित हो रहा है। कड़ाके की ठंड के बीच ना तो अलाव की व्यवस्था की गई है और ना ही पानी की। जिम्मेदार बोले- शिकायत मिलने पर करेंगे कार्रवाई खरीदी केंद्रों में छाया, पानी, अलाव की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रति बोरी 40 किलो 580 ग्राम खरीदी नए वारदानों में लेनी है। और जहां पर पुराने वारदानों की सप्लाई है। वहां 40.500 ग्राम की वजन किसानों से लेना है। जिन खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था और निर्धारित वजन से ज्यादा वजन लेने की शिकायतें प्राप्त होंगी। वहां जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।


