जिले के नान गोदामों में अभी भी कोर पीडीएस का चावल नहीं पहुंच रहा है। केवल रायपुर जिले में ही जिन 75 राइस मिलरों ने खाद्य विभाग के साथ चावल पहुंचाने का एग्रीमेंट किया है उन्होंने अभी तक स्टॉक क्लियर नहीं किया है। इसमें कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने धान उठाव के बाद एक किलो भी चावल नहीं जमा किया। करीब एक दर्जन पर 50 टन से ज्यादा चावल बकाया है। तिरुपति राइस मिल वाले इस सूची में सबसे टॉप पर हैं। उन पर 2443.62 टन चावल बकाया है। पर्ल राइस एंड एग्रो प्रोडक्ट वालों ने 1084.24 टन चावल जमा नहीं किया है। इसके अलावा ऐसे भी राइस मिलर है जिन पर 200 से 500 टन चावल बकाया है। इधर, राज्य सरकार के आदेश के अनुसार इस बार फरवरी और मार्च का चावल एक साथ लोगों को देना है। इसकी शुरुआत 1 फरवरी से हो चुकी है। लेकिन अभी तक सभी राशन दुकानों में पर्याप्त चावल का स्टॉक नहीं होने की वजह से वितरण शुरू नहीं हो पाया है। अब अफसरों का कहना है कि जल्द ही सभी जगहों पर चावल पहुंचाने का काम पूरा हो जाएगा। एक भी मिलर पर कोई कार्रवाई नहीं हैरानी की बात है कि इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद मिलर्स पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पिछले एक साल में इन सभी मिलर्स को स्टॉक क्लियर करना था। ताकि 2026 में जो धान उठाव किया गया है उसके चावल की सप्लाई हो सके। लेकिन पिछले साल का ही चावल नहीं मिलने की वजह से इस साल की सप्लाई कब शुरू होगी यह भी तय नहीं है। राइस मिलर्स पर बकाया चावल होने पर उन्हें ब्लैक लिस्ट करने के साथ जमा सुरक्षा निधि को जब्त किया जा सकता है। इसके बावजूद प्रशासन ऐसे मिलरों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। कार्रवाई नहीं होने की वजह से मिलरों के हौसले भी बुलंद हैं। सख्ती कर रहे, वसूली भी की जाएगी
जो भी मिलर चावल नहीं दे रहे हैं उन पर सख्ती की जा रही है। हर हाल में बकाया चावल की वसूली की जाएगी। नोटिस देने के बाद भी चावल की सप्लाई नहीं होती है तो उन्हें काली सूची में डाल दिया जाएगा।
– भूपेंद्र मिश्रा, जिला खाद्य नियंत्रक रायपुर


