भास्कर न्यूज | जालंधर हिंदू धर्म में संक्रांति का विशेष महत्व है। सूर्य भगवान के राशि बदलने को संक्रांति कहते हैं। सूर्य भगवान 13 फरवरी को मकर राशि से कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। शास्त्रों में सूर्य को सभी ग्रहों का पिता माना गया है। सूर्य देव के शुभ होने पर व्यक्ति का सोया हुआ भाग्य भी बदल जाता है। सूर्य का गोचर बहुत मायने रखता है क्योंकि इससे सभी 12 राशियों के जीवन में बदलाव आते हैं। इस दिन विजया एकादशी का संयोग भी बन रहा है। स्नान-दान के लिए ये महत्वपूर्ण दिन है, इससे रोग, दोष, दरिद्रता से मुक्ति मिलती है। इस दिन स्नान-दान और सूर्य भगवान को अर्घ्य देने का विधान ग्रंथों में विधिवत बताया गया है। हर संक्रांति का अपना महत्व होता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में सूर्य पूजा कर के अर्घ्य देने से शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं। परिवार में किसी भी सदस्य पर कोई मुसीबत या रोग नहीं होता। शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर के पुजारी गौतम भार्गव ने बताया कि ज्योतिष ग्रंथों में अलग-अलग दिन वार और नक्षत्र के अनुसार संक्रांति का फल बताया गया है। यानी स्नान-दान से मिलने वाला पुण्य कभी खत्म नहीं होगा। उन्होंने बताया कि कुंभ संक्रांति पर शिववास का संयोग दिन भर है। इन योग में गंगा स्नान कर भगवान शिव और सूर्य देव की पूजा करने से साधक पर भगवान शिव की विशेष कृपा बरसेगी। सूर्य की संक्रांति पर पितरों की संतुष्टि के लिए श्राद्ध करने का भी विधान ग्रंथों में बताया गया है। इस दिन किए गए स्नान-दान से मिलने वाला पुण्य कभी खत्म नहीं होता। सूर्य भगवान को दे अर्घ्य सूर्य भगवान की पूजा के लिए तांबे की थाली और तांबे की गड़वी का इस्तेमाल करें। थाली में लाल चंदन, लाल फूल और घी का दीपक रखें। दीपक तांबे या मिट्टी का हो सकता है। अर्घ्य देते समय गड़वी के पानी में लाल चंदन मिलाएं और लाल फूल भी डालें। ऊँ घृणि सूर्यआदित्याय नमः मंत्र बोलते हुए अर्घ्य दें और प्रणाम करें। अर्घ्य वाले पानी को जमीन पर न गिरने दें। किसी तांबे के बर्तन में ही अर्घ्य गिराएं। फिर उस पानी को किसी ऐसे पेड़-पौधे में डाल दें। जहां किसी का पैर न लगे।


