कुछ महिलाएं कानून का गलत इस्तेमाल कर रहीं:राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्ष बोलीं- परिवार के झगड़े वकील, पुलिस के पास जाएं, ये ठीक नहीं

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने बेंगलुरु के AI इंजीनियर अतुल सुभाष की खुदकुशी की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। भोपाल में जनसुनवाई करने पहुंची रहाटकर ने भास्कर से बातचीत में कहा कि जो कानून महिलाओं को हिंसा और उत्पीड़न से बचाव के लिए बनाए गए हैं, उनका कुछ महिलाएं गलत इस्तेमाल कर रही हैं। इन कानूनों से पुरुषों पर अत्याचार हो रहा है, तो ये गलत है। रहाटकर ने कहा कि परिवार के झगड़े पुलिस-वकील तक पहुंच रहे हैं, ये ठीक नहीं है। एमपी में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष की नियुक्ति न होने और बलात्कार की बढ़ती घटनाओं को लेकर कहा कि महिलाओं के प्रति सरकार को संवेदनशील बनने की जरूरत है। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: बैंगलुरु के AI इंजीनियर ने पत्नी से प्रताड़ित होकर खुदकुशी की, क्या कहेंगी? जवाब: यह घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। ये घटना नहीं होना चाहिए। जब हम समाज में घट रही घटनाओं को देखते हैं तो ऐसा लगता है कि कहीं न कहीं कुछ कमी और गड़बड़ है। महिलाओं के लिए जो कानून बनाए गए हैं, इनका उद्देश्य महिलाओं को हिंसा, उत्पीड़न से रक्षा करना है। मगर, कुछ महिलाएं इन कानूनों का गलत इस्तेमाल करती है जो मंजूर नहीं है। ये कानून महिलाओं की रक्षा और सम्मान के लिए है, अगर इनकी वजह से पुरुषों पर अत्याचार हो रहा है, ताे यह गलत है। कुछ महिलाओं की इन हरकतों से देश की हजारों महिलाओं को न्याय देने वाले कानून पर प्रश्न चिन्ह उठता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। सवाल: महिला आयोग देशभर में जनसुनवाई क्यों कर रहा है? जवाब: हमने राष्ट्रीय महिला आयोग आपके द्वार कार्यक्रम शुरू किया है। आयोग के पास देशभर से शिकायतें आती हैं। गांव-देहात की महिलाएं दिल्ली तक नहीं पहुंच पातीं, हमने सोचा कि हम लोग ही उनके पास चले जाएं। राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन केंद्र के नियमों के तहत होता है जबकि राज्य महिला आयोग का गठन राज्य सरकार करती है। दोनों आयोग अपनी- अपनी जगह पर काम करते हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग महिलाओं से जुड़े विषयों पर रिसर्च करता है। इन मुद्दों को केंद्र सरकार को बताया जाता है, जिससे सरकार को नए कानून बनाने में मदद मिलती है। सवाल:एमपी में 4 साल से महिला आयोग की अध्यक्ष नहीं है, 45 हजार केस पेंडिंग है? जवाब: हां, मुझे पता चला कि यहां अध्यक्ष का पद 4 साल से खाली है। मुझे बताया कि किसी कोर्ट केस की वजह से नियुक्ति में अड़चन आ रही है। मैंने एमपी सरकार को कहा है कि इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाए। आयोग के अध्यक्ष न होने की स्थिति में महिलाएं राष्ट्रीय महिला आयोग के पास शिकायतें करती हैं। इससे हम लोगों पर प्रेशर बढ़ता है। जहां तक 45 हजार केस के पेंडिंग होने का सवाल है तो हमें राज्य के आयोग को और ज्यादा सक्षम बनाने की जरूरत है। पुलिस यदि मामले की शिकायत नहीं कर रही है तो पुलिस को भी संवेदनशील बनने की जरूरत है। सवाल: लिव-इन रिलेशनशिप टूटने के बाद होने वाली रेप की शिकायतों पर क्या कहेंगी? जवाब: इसमें एक बात जरूर है कि जब कोई कपल लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है तो इसमें दोनों की आपसी सहमति होती है। संबंध टूटने पर यदि कोई झूठी शिकायत करता है तो ये कानून का दुरुपयोग है। ऐसे रिलेशन में कहीं न कहीं शादी का वादा तो किया जाता है, जब रिश्ता टूटता है तो महिला की मानसिक स्थिति पर जो असर होता है। इसके बारे में भी सोचने की जरूरत है। ये भी सोचना चाहिए कि जो वादे किए जाते हैं उसमें कपल्स को मिलकर ये वादे पूरे करने चाहिए। ऐसा भी नहीं है कि इस समस्या का समाधान सिर्फ कानून ही करेगा,समाज को भी इन लोगों का सम्मान करना चाहिए। सवाल: बलात्कार के मामले में एमपी तीसरे नंबर पर है, क्या कहेंगी? जवाब: इसकी सबसे बड़ी वजह विकृत मानसिकता है, जिसे बदलने की जरूरत है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है। महिलाओं के लिए काम करने वाले जितने भी सिस्टम है उन्हें भी संवेदनशीन होने की जरूरत है। कोर्ट में केस दर्ज होने के बाद पीड़िताओं को जल्द न्याय मिलना चाहिए। पहले हम सभी संयुक्त परिवार में रहते थे। पति- पत्नी के बीच कुछ मनमुटाव होता था तो परिवार के सदस्य समझाइश के लिए होते थे। पर आज ये चीजें खत्म होती जा रही है। घर के दादा- दादी, नाना- नानी, चाचा- चाची की जगह एडवोकेट, पुलिस और महिला आयोग ने ले ली है। यह बहुत चिंता का विषय है। इन सभी विषयों के सुधार के लिए कोई एक सिस्टम काफी नहीं है। सरकार, प्रशासन, पुलिस, आयोग के साथ समाज और परिवार को आगे आना होगा। सवाल: राष्ट्रीय पुरूष आयोग की मांग को कितना जायज मानती हैं? जवाब: देश में महिलाओ के साथ लगातार हिंसा, बलात्कार, घरेलू हिंसा की घटनाएं होती है। इससे लड़ने में उनकी मदद के लिए महिला आयोग बनाया गया था। आज भी देश में महिलाओं के प्रति हीन भाव है। इसे बदलने के लिए कानून का प्रभावी इस्तेमाल करना ही हाेगा। हमें यह ध्यान देने की जरूरत है कि इन कानूनों का दुरुपयोग न हो। कुछ एक घटनाओं के कारण महिला सुरक्षा के लिए बने कानूनों पर उंगली नहीं उठानी चाहिए। सवाल: मध्यप्रदेश सरकार को क्या सलाह देना चाहेंगी? जवाब: ये मैं केवल मध्यप्रदेश के संदर्भ में नहीं कहूंगी। राज्यों में जो व्यवस्थाएं हैं उन्हें महिलाओं के प्रति संवेदनशील रहना होगा। राज्य सरकारें महिलाओं के लिए योजनाएं बनाएं। महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत करने की जरूरत है। जनसुनवाई में भड़कीं महिला आयोग अध्यक्ष:कहा- ऐसा पहली बार हुआ जब आईजी-कमिश्नर नहीं आए भोपाल में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर महिलाओं से संबंधित मामलों की जनसुनवाई में शामिल हुईं। बैठक में भोपाल कमिश्नर संजीव सिंह, भोपाल आईजी और पुलिस कमिश्नर हरि नारायणचारी मिश्रा की गैर-मौजूदगी को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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