जिले में कई वर्षों से दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां कुप्रथा के चलते शादी विवाह नहीं होते। उन गांवों में कुछ घटनाएं होने की वजह से आयोजन बंद हैं। ऐसे सभी गांवों के लोग या तो शादी विवाह के लिए दूसरे गांव में जाते हैं या फिर शहर में मैरिज गार्डन में जाकर शादी विवाह करते हैं। ऐसे सभी गांवों में यादव समाज से इस कुप्रथा को मिटाने का बीड़ा उठाया। रविवार को प्रथा मिटाने का पहला आयोजन ढेंकन गांव में हुआ, जहां पहले यादव समाज के वरिष्ठ नागरिकों को पंच परमेश्वर के रूप में शपथ दिलाई गई। इसके बाद पंच परमेश्वरों व समाज के लोगों ने सबसे पहले गीता स्वाध्याय का पाठ करवाया, इसके बाद मंत्र उच्चारण के साथ हवन हुआ, कन्या भोज कराया और गांव में ही शादियां करने की सहमति दी। आयोजन में जिला पंचायत अध्यक्ष राव अजय प्रताप सिंह यादव भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन का उद्देश्य यह है कि जो लोग कुप्रथाओं के चलते अपने गांव में शादी विवाह के आयोजन नहीं करते, जिसकी वजह से उन्हें लाखों रुपए अधिक खर्च करना पड़ता है, शहर में गार्डन में शादी विवाह करने पर लाखों रुपए का खर्चा बढ़ जाता है। इन सभी खर्च को कम करने के उद्देश्य एवं कुप्रथाओं को मिटाने के लिए शुरुआत की गई है।


