सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष महोत्सव की शुरु हो गया है। महाशिवरात्रि के मौके पर रविवार को 2 लाख से ज्यादा भक्त धाम पहुंच चुके हैं। 7 दिवसीय महोत्सव की शुरुआत शनिवार से शुरू हुई जो 20 फरवरी तक चलेगा। आयोजन स्थल पर व्यवस्था संभालने के लिए 1200 से अधिक सेवादार तैनात किए गए हैं। ‘ग्रीन शिवरात्रि’ महोत्सव के तहत कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने पर्यावरण-हितैषी आयोजन आध्यात्मिकता को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया है। महोत्सव का मुख्य आकर्षण ‘द्वादश ज्योतिर्लिंग गार्डन’ की स्थापना है। पंडित मिश्रा परिसर में 12 विशेष पौधे रोपेंगे, जो भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का प्रतिनिधित्व करेंगे। इन पौधों को धाम से उनकी वास्तविक भौगोलिक दूरी के आधार पर ‘स्केल डिस्टेंस’ पद्धति से रोपित किया जाएगा। इनमें श्री महाकालेश्वर (127 किमी), श्री ओंकारेश्वर (135 किमी), श्री केदारनाथ (864 किमी) और श्री रामेश्वरम (1557 किमी) जैसे प्रमुख ज्योतिर्लिंगों की दूरियों को दर्शाया जाएगा। तीन संकल्पों पर विशेष बल… बेलपत्र वृक्षारोपण : धाम में व्यापक स्तर पर बेलपत्र के पौधे लगाए जाएंगे। अभिषेक जल का सदुपयोग : शिवलिंग पर अर्पित किए गए जल को भूगर्भ जल पुनर्भरण और पौधों की सिंचाई हेतु उपयोग में लाया जाएगा। वैज्ञानिक निर्माल्य विसर्जन : पूजा के बाद एकत्रित फूलों और बेलपत्रों (निर्माल्य) को नदियों में विसर्जित करने के बजाय उनसे जैविक खाद बनाई जाएगी। “महादेव को पाने के लिए कुबेरेश्वर धाम आना पड़ता है”
कुबेरेश्वर धाम में सात दिवसीय ‘रुद्राक्ष महोत्सव 2026’ की शुरुआत शनिवार से हुई, जो 20 फरवरी तक चलेगी। पहले दिन भगवान गणेश की आरती और ‘ॐ नमः शिवाय’ के घोष के साथ शिवमहापुराण कथा की शुरुआत हुई। पंडित मिश्रा ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार ट्रेन के लिए स्टेशन और फ्लाइट के लिए एयरपोर्ट जाना होता है, उसी तरह महादेव को पाने के लिए कुबेरेश्वर धाम आना पड़ता है। पानी बचाने का संदेश देंगे
पंडित मिश्रा ने बताया कि यह धाम 12 ज्योतिर्लिंगों के मध्य में स्थित है और यहां वही आता है जिससे बाबा स्वयं प्रेम करते हैं। सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हुए कहा, “बेटी आपके पुण्यों की रसीद है।” उन्होंने एक नया नारा देते हुए कहा कि अब केवल ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ ही नहीं बल्कि ‘बहू पढ़ाओ, देश बचाओ’ के संकल्प की आवश्यकता है। जिस घर में बेटी और बहू का सम्मान होता है, वहां दरिद्रता कभी नहीं आती। पर्यावरण के प्रति सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि शादियों में पानी की बर्बादी रोकना अनिवार्य है। पानी की बोतलों पर लिखा होना चाहिए “मैं जल हूं, आने वाला कल हूं।” यदि हमने आज जल का सम्मान नहीं किया, तो भविष्य में इसके लिए तरसना पड़ेगा। समझाया कि मंदिर में सिर झुकाना भगवान के ‘चरणों’ में होना है, लेकिन मंदिर से निकलकर कार्यक्षेत्र पर जाते समय भगवान को याद रखना उनकी ‘शरण’ में होना है। ऊंची इमारतों पर भी बल तैनात मुख्य प्रवेश द्वारों पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं। हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर से भी जांच हो रही है। मंदिर परिसर, भोजनशाला और प्रमुख मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। ड्रोन कैमरों से मंदिर परिसर और बाहरी इलाकों की निगरानी हो रही है। वॉच टावर बनाए गए हैं। पुलिस बल लगातार निगरानी कर रहा है। आसपास की ऊंची इमारतों पर भी सुरक्षा बल तैनात है। रोजाना कथा और संध्या महाआरती का कार्यक्रम
महोत्सव में प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक श्री शिवमहापुराण कथा का वाचन हो रहा है। वहीं, शाम 6:30 बजे संध्या महाआरती का आयोजन किया जा रहा है। भीड़ नियंत्रण के लिए भोजनशाला में चार कतारों की व्यवस्था की गई है। 200 स्टालों के माध्यम से प्रसाद वितरण हो रहा है। आयोजन स्थल पर एक नजर पंडित प्रदीप मिश्रा को भी जानिए… मध्य प्रदेश के सीहोर जिले रहने वाले पंडित मिश्रा कथा वाचक बनने से पहले, निजी स्कूल में बच्चों को शिक्षा देते थे। कोराना कॉल के दौरान डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से, विशेषकर शिव पुराण कथा के कारण, वे “सीहोर वाले बाबा” के नाम से प्रसिद्ध हुए। प्रतिवर्ष सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष महोत्सव का आयोजन करते हैं। वे “एक लोटा जल, हर समस्या का हल” का मंत्र देते हैं।


