प्रशासन की सख्ती की वजह से लोग थोड़ा कंट्रोल में हैं। इस बार रुद्राक्ष नहीं बंट रहे हैं। रुद्राक्ष बांटते तो यहां पैर रखने तक की जगह नहीं होती। इस बार भीड़ बहुत कम है। दो साल पहले महाशिवरात्रि के आयोजन में इतनी भीड़ थी कि पूरे एरिया में लोगों को कदम रखने की जगह नहीं मिल रही थी। ये कहते हुए देवेंद्र मेवाड़ा के चेहरे पर थोड़ी मायूसी दिखती है। वह आगे कहते हैं, इस बार धंधा मंदा है। दरअसल, मेवाड़ा ने सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में महाशिवरात्रि के मौके पर चाय-नाश्ते की एक छोटी सी दुकान लगाई थी। उनकी तरह सैकड़ों छोटे दुकानदार इस उम्मीद में यहां आए थे कि लाखों श्रद्धालु जुटेंगे और उनकी अच्छी कमाई होगी। इस बार ऐसा नहीं हुआ। इसकी वजह महाशिवरात्रि पर रुद्राक्ष न बांटने का फैसला बताया जा रहा है। हालांकि, इस मसले पर पं. प्रदीप मिश्रा का कहना है कि पिछले दो सालों से रुद्राक्ष बांटने का कार्यक्रम हो रहा था। इस साल प्रशासन की सख्ती के बाद आयोजकों ने फैसला बदला। पढ़िए महाशिवरात्रि पर किस तरह से कुबेरेश्वर धाम का नजारा बदला हुआ था। हाईवे से धाम तक का सफर
महाशिवरात्रि के दिन रविवार को सुबह करीब 7 बजे, सीहोर जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर भोपाल-इंदौर हाईवे पर यातायात सामान्य था। कुछ पुलिसकर्मी मुस्तैद थे। हाईवे से एक सीधा रास्ता कुबेरेश्वर धाम की ओर जाता है, जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी, लेकिन वाहनों को रोका नहीं जा रहा था। रास्ते में भी वाहनों की संख्या न के बराबर थी। इक्का-दुक्का गाड़ियां ही धाम की ओर बढ़ती दिख रही थीं। धाम के मुख्य द्वार से लगभग 500 मीटर पहले, सड़क के दोनों ओर वाहन पार्किंग के बोर्ड लगे थे। यहां भी पुलिस के जवान तैनात थे, जो आने वाले वाहनों को पार्किंग की ओर भेज रहे थे, लेकिन पार्किंग का एक बड़ा हिस्सा खाली पड़ा था। आधे से भी कम जगह पर वाहन खड़े थे, जो इस बात का स्पष्ट संकेत था कि अपेक्षित भीड़ नहीं जुटी है। लोग गाड़ियों से उतरकर पैदल ही आश्रम की तरफ बढ़ रहे थे, लेकिन सड़क पर इतनी जगह थी कि कहीं भी भीड़ या धक्का-मुक्की का एहसास नहीं हुआ। दुकानदार निराश, बोले- मक्खी मार रहे हैं
आश्रम के मुख्य द्वार के पास सड़क के दोनों ओर लगी अस्थायी दुकानों पर ग्राहकों का टोटा साफ नजर आ रहा था। ज्यादातर दुकानदार खाली बैठे थे या आते-जाते लोगों को उम्मीद भरी नजरों से देख रहे थे। इन्हीं में से एक अनुसुइया बाई हैं। वह कहती हैं, “हमें दुकान लगाए चार दिन हो गए हैं, लेकिन हजार रुपए की बिक्री भी नहीं हुई। भक्त तो आ रहे हैं, लेकिन कोई खरीदारी नहीं कर रहा। दुकान की यह छोटी-सी जगह हमें 10 हजार रुपए में मिली है और हमारा सारा सामान जस का तस पड़ा है। पिछली बार जब हमने दुकान लगाई थी, तो धंधा बहुत अच्छा हुआ था, क्योंकि लोग बहुत आए थे। इस बार लोग कम हैं, इसलिए दुकानदारी बिल्कुल नहीं है। हम तो बस मक्खी मारते बैठे हुए हैं। अब फंस गए हैं, पैसा दे दिया है तो कुछ कर भी नहीं सकते।” देवेंद्र मेवाड़ा की कहानी भी इससे अलग नहीं है। वह कहते हैं कि लागत का पैसा भी नहीं निकल पाया है। श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था, बोले- बाबा की कृपा है
हालांकि, दुकानदारों के चेहरे पर जहां मायूसी थी, वहीं श्रद्धालुओं के लिए यह अनुभव पिछले साल की तुलना में कहीं ज्यादा सुखद और व्यवस्थित था। धाम परिसर के अंदर लोग शांति से पूजा-अर्चना कर रहे थे। जमीन पर और क्यारियों पर शिवलिंग बनाकर पूजा करते भक्तों का तांता लगा था। जगह-जगह बड़ी एलईडी स्क्रीन और साउंड बॉक्स लगाए गए थे, जिन पर मंत्रोच्चार और शिवलिंग की पूजा का सीधा प्रसारण हो रहा था। रुद्राभिषेक के बाद धाम की ओर से लोगों के लिए फलाहार की व्यवस्था की गई थी। मुख्य परिसर के बगल में बने एक विशाल डोम में पं. प्रदीप मिश्रा शिव पुराण की कथा सुना रहे थे। इस मुख्य डोम के पीछे तीन और छोटे डोम बनाए गए थे, ताकि अधिक से अधिक लोग कथा सुन सकें। गुजरात के वडोदरा से आईं गीता शुक्ला ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “मैं कुबेरेश्वर धाम दूसरी बार आई हूं। यहां न पानी की कमी है, वॉशरूम बहुत साफ-सुथरे हैं और नहाने की भी हर सुविधा है। भक्तों को कोई परेशानी नहीं हो रही है। पंडित प्रदीप मिश्रा बोले- आयोजन के बाद बांटेंगे रुद्राक्ष
कुबेरेश्वर धाम में सेवाएं देने वाले मनोज मामा ने बताया, “लाखों श्रद्धालु आस्था के साथ यहां पहुंचे हैं। श्रद्धालुओं के लिए 1.80 लाख स्क्वायर फीट का भव्य पंडाल बनाया गया है और करीब 60 हजार स्क्वायर फीट में अतिरिक्त पंडाल भी लगाए गए हैं। प्रशासन का पूरा सहयोग मिल रहा है और व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चल रही हैं।” इस पूरे आयोजन और रुद्राक्ष वितरण को लेकर हमने धाम प्रमुख पंडित प्रदीप मिश्रा से सीधी बात की। सवाल: इस बार रुद्राक्ष महोत्सव में रुद्राक्ष क्यों नहीं बांटे जा रहे हैं?
जवाब: यह कोई नई बात नहीं है, कई वर्षों से यही नियम है। किसी भी बड़े आयोजन के दौरान रुद्राक्ष का वितरण बंद रहता है। इस बार भी रुद्राक्ष महोत्सव में वितरण बंद है। आयोजन समाप्त होने के कुछ समय बाद, लगभग दो महीने में, वितरण फिर से शुरू हो जाएगा और श्रद्धालुओं को रुद्राक्ष मिलने लगेगा। सवाल: इस बार कितनी संख्या में श्रद्धालु आए हैं?
जवाब: पहले दिन लगभग ढाई लाख श्रद्धालु यहां पहुंचे थे और आज (महाशिवरात्रि पर) यह संख्या साढ़े चार लाख के ऊपर है। हमें विश्वास है कि सात दिनों का पूरा आंकड़ा मिलाकर बीस से पच्चीस लाख तक पहुंचेगा। सवाल: आपने दस लाख लोगों के आने का दावा किया था, क्या भक्त उससे कम आए?
जवाब: नहीं-नहीं, बाबा के बहुत भक्त हैं, उनको गिनना मुश्किल है। सवाल: आपके आयोजनों में कई बार भगदड़ की स्थिति बनी है। इस बार क्या विशेष व्यवस्था की गई है?
जवाब: प्रशासन और धाम समिति मिलकर अच्छी व्यवस्था बनाने में लगी हुई है। इस बार हमने एक विशेष कॉरिडोर बनाया है, जिससे आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस या अन्य वाहन आसानी से निकल सकें। एक सड़क को पूरी तरह से खाली रखा गया है। इसके अलावा, भोजन, पानी और शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। कहीं भी किसी तरह की अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी
सीहोर के एसपी दीपक शुक्ला ने बताया कि महाशिवरात्रि का आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हुआ। कहीं भी किसी तरह की अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी। ट्रैफिक को लेकर हमने केवल बड़े वाहनों को डायवर्ट किया, छोटे वाहनों को डायवर्ट करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। ऐसा लगता है कि इस बार छोटे वाहनों का उपयोग कम हुआ, जिससे यातायात की समस्या नहीं हुई। वहीं, सीहोर के एसडीएम तन्मय वर्मा ने कहा- हम अभी भीड़ का अंतिम अनुमान लगा रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर आयोजन सफल रहा। किसी को भी किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। जहां भी छोटी-मोटी समस्याएं सामने आईं, उन्हें तुरंत हल कर लिया गया।


