पंचायतनामा चंदनकियारी पंचायत के कुसुमकियारी पंचायत आज तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहचान बना चुका है। प्रखंड का एकमात्र सरकारी आईटीआई यहां संचालित होता है, जहां चार विभिन्न ट्रेडों में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्ष 2017 से पहले यहां के छात्र-छात्राओं को आईटीआई या अन्य तकनीकी शिक्षा के लिए बोकारो और धनबाद जैसे बड़े शहर जाना पड़ता था। यहां के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवक और युवतियों को बाहर जाकर पढ़ाई करना आसान नहीं था। लेकिन अब स्थानीय स्तर पर आईटीआई खुलने के बाद ग्रामीण परिवेश के बच्चे अपने ही क्षेत्र में रहकर तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। जिससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है। इस संस्थान से हर वर्ष दर्जनों छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर निकलते हैं और कई युवा निजी कंपनियों, औद्योगिक इकाइयों तथा स्वरोजगार के माध्यम से अपने भविष्य को संवार रहे हैं। तकनीकी दक्षता हासिल करने के बाद युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे रोजगार के बेहतर अवसरों की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इससे क्षेत्र में शिक्षा का स्तर भी लगातार ऊंचा हो रहा है। प्रखंड के कुसुमकियारी पंचायत सामाजिक सौहार्द और भाईचारे के लिए भी जानी जाती है। यहां सभी समुदायों के लोग वर्षों से मिलजुल कर रहते आए हैं। पंचायत में आज तक किसी प्रकार का बड़ा सामुदायिक विवाद सामने नहीं आया है। दोनों समुदायों के लोग एक-दूसरे के पर्व-त्योहारों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं, जिससे आपसी संबंध और भी मजबूत होते हैं। यही आपसी सहयोग और समन्वय पंचायत की सबसे बड़ी ताकत है। इसी पंचायत में स्थित प्रसिद्ध घंटी बाबा आश्रम श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। दंतकथाओं के अनुसार घंटी बाबा जंगल के पशु-पक्षियों को भोजन कराने के बाद ही स्वयं अन्न ग्रहण करते थे। उनकी करुणा और त्याग की भावना आज भी लोगों को प्रेरित करती है। उनकी स्मृति में जूना अखाड़ा से आए महंत प्रेमानंद गिरी द्वारा आश्रम का पुनर्निर्माण कराया गया और भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। हाल ही में प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुआ है। पंचायत तेलो पूर्वी जनसंख्या 12000 कुसुमकियारी में बना आईटीआई प्रशिक्षण केंद्र। चौहद्दी : उत्तर-पश्चिम में गवाई नदी है, दक्षिण में तसर कुआं और पूरब में पश्चिम बंगाल की सीमा है। कनेक्टिविटी सभी तरह के वाहनों से आना-जाना होता है। जिला मुख्यालय से दूरी 20 किमी पहचान कॉलेज और मंदिर साक्षरता दर 75 प्रतिशत


