शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का काम कंपनी ने शुरू कर दिया है मगर 4 माह बाद भी कंट्रोल रूम का सेटअप तैयार नहीं कराया जा सका है। कूड़ा उठाने के लिए गाड़ियां कितने फेरे वार्डों में लगा रही है इसकी ऑनलाइन मॉनिटरिंग के बिना ही निगम कंपनी को करोड़ों का भुगतान कर रहा है। बीते नवंबर में ही निगम ने करीब 3.50 करोड़ का भुगतान एएसआर स्मार्ट सिटी लिमिटेड को किया था। दरअसल, कंट्रोल रूम के बिना गाड़ियों के आने-जाने का समय केवल रजिस्टर में दर्ज हो रहा है, जिसमें गाड़ियों के फेरे और डीजल खर्च की राशि को आसानी से बदला जा सकता है। गाड़ियां वास्तव में वार्ड के अंतिम छोर तक जा रही हैं या आधे रास्ते से लौट रही हैं, जीपीएस मॉनिटरिंग के बिना सटीक जानकारी जुटा पाना मुश्किल है। निगम की बिल्डिंग में कंट्रोल रूम के लिए अलॉट कमरे पर लगी कुंडी। नियम के अनुसार कंपनी को भुगतान कूड़ा उठान की मात्रा (टिपिंग फीस) और गाड़ियों के तय चक्करों (रूटीन कंप्लायंस) के आधार पर होना चाहिए। मगर जब कंट्रोल रूम ही नहीं है तो निगम के पास कंपनी के दावों को क्रॉस-चेक करने का कोई डिजिटल सबूत नहीं है। ऐसे में करोड़ों का भुगतान केवल कागजी रिपोर्ट और मैनुअल एंट्री के आधार पर किया जा रहा है। वहीं, हेल्पलाइन नंबर (1800 203 5850) पर डेली 8 घंटे में 15 शिकायतें पहुंच रही हैं। कंट्रोल रूम बना होता और उसका प्रचार-प्रसार करते तो यह गिनती 100 के पार होती। निगम बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर में कमरा 106 में सरकारी रिकॉर्ड हटवाए बिना ही कंपनी को अलॉट कर दिया गया है। दूसरी ओर ट्रिपल आईसी में ऑप्शन दिया गया है मगर जगह नाकाफी है। चूंकि पहले ही यहां स्टॉफ व मशीनरी का सेटअप बना हुआ है। बड़ी-बड़ी एलईडी स्क्रीन लगी हुई है। वहीं कंपनी को 5 बड़ी एलईडी स्क्रीन व स्टॉफ तैनात करने होंगे। इसके अलावा पब्लिक शिकायत लेकर आती है तो उन्हें भी मैनेज करना होगा। गौर हो कि बिना कंट्रोल रूम के शहर की सफाई व्यवस्था केवल कंपनी की मर्जी पर टिकी है। ^ कूड़ा कलेक्शन को लेकर काफी प्रोग्रेस हुआ है। कंट्रोल रूम भी जल्द तैयार करने के निर्देश कंपनी व निगम अफसरों को देंगे। जवाब तलब करेंगे कि कंट्रोल रूम का सेटअप तैयार कराने में देरी क्यों हो रही है। -जतिंदर सिंह भाटिया, मेयर शहर की सफाई का जिम्मा निगम के हेल्थ विभाग के पास है। कंट्रोल रूम का सेटअप तैयार न होने पर कटघरे में है। कंपनी के काम की रोजाना जांच करना और रिपोर्ट तैयार करना हेल्थ विभाग का काम है। जब कंट्रोल रूम नहीं बना, तो हेल्थ विभाग किस आधार पर कंपनी को क्लीन चिट दे रहा है? कंपनी जो िटपिंग फीस और गाड़ियों के फेरों का बिल क्लेम करती है, उसे सबसे पहले हेल्थ विभाग के इंस्पेक्टर और अधिकारी वेरिफाई करते हैं।


