भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा अन्नदाताओं को कृषि कार्य में काम आने वाले औजारों पर भी सरकार द्वारा अनुदान दिया जा रहा है। यह अनुदान 10 हजार से लेकर 2.5 लाख रुपए तक है। कृषि विभाग ने कृषि कार्य में प्रयुक्त 15 से अधिक ओजारों पर 939 किसानों को करीब 4 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जा चुका है। इसके लिए करीब 9501 किसानों ने कृषि विभाग में ऑनलाइन आवेदन किया था। शेष आवेदनों की पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर प्रशासनिक स्वीकृतियां जारी की जा रही है। औजारों पर 2.5 लाख रुपए तक अनुदान दिया जा रहा है। अनुदानित राशि सीधें किसानों के खातों में ट्रांसफर की जा रही है। प्रमुख औजारों में कुट्टी काटने की मशीन, सिड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, मल्टीक्रॅाप, थ्रेशर, रोटावेटर, हेरो, ट्रैक्टर ड्रॉन रिपर, कल्टीवेटर, डिस्क प्लो, एमबी प्लाऊ, पावर बीडर, रिवर्सिबल हाइड्रोलिक प्लाऊ, लेवलर, रीजवेड प्लांटर आदि शामिल है। पिछले साल किसानों को औजारों पर 6 करोड़ रुपए ही अनुदान दिया। था। { कुट्टी करने की मशीन :- यह सूखे व हरे चारे की कुट्टी यानि महीन करने में काम आती है। { सीड्र कम फर्टिलाइजर ड्रिल :- तैयार खेत में खाद-बीज उराई के लिए काम आती है। { मल्टीक्रॉप थ्रेशर: – कटाई के बाद फसल का दाना व भूसा अलग करने के काम आती है। { रोटावेटर: – खेत की निराई-गुड़ाई व मिट्टी पलटने का काम करता है। { हेरो :- यह मशीन भी खेत की निराई-गुड़ाई में काम आती है। { ट्रैक्टर ड्रॉन रिपर :- यह मशीन फसल कटाई के काम आती है। { कल्टीवेटर:- इससे खेत की हंकाई व जुताई की जाती है। { डिस्कप्लो: – यह मशीन भी खेत की मिट्टी पलटने के काम आती है। { पावर वीडर :- फसल की निराई-गुड़ाई में काम आता है। { रिवर्सिबल हाइड्रोलिक पलाउ:- खेत की जुताई के साथ ही यह मशीन आगे-पीछे चलकर खेती का काम करती है। { लेवलर: – यह यंत्र भी खेत को समतल करने के काम आता है। { रीजवेड प्लांटर: – यह खेत में डोली बनाने के काम आने के साथ ही पौधों की रोपाई भी करती है। कृषि में काम आने वाले ये प्रमुख औजार, जिन पर कृषि विभाग से मिलता है ^ कृषि कार्य में काम आने वाले औजारों पर अनुदान प्राप्त करने के लिए किसानों को राज किसान पॉर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। संबंधित औजार पर स्वीकृत राशि भी सीधे किसानों के खातों में ही जमा होगी। अब तक आवेदन करने वाले 939 किसानों के खातों में 6.08करोड रुपए अनुदानित राशि ट्रांसफर की गई। शेष आवेदनों का भी भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। – विनोदकुमार जैन, संयुक्त निदेशक कृषि भीलवाड़ा


