विधानसभा में पूछे गए प्रश्न का गलत जवाब भेजना श्रीगंगानगर के जॉइंट डायरेक्टर (एग्रीकल्चर) सतीश शर्मा को भारी पड़ गया। जिसके बाद कृषि विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से एपीओ कर दिया है। एपीओ किए जाने के बाद अब उन्हें प्रदेश मुख्यालय में नियमित रूप से हाजरी देनी होगी। सतीश शर्मा वर्तमान में श्रीगंगानगर में जॉइंट डायरेक्टर एग्रीकल्चर के पद पर पदस्थ हैं। इसके साथ ही उनके पास एडिशनल डायरेक्टर एग्रीकल्चर का अतिरिक्त चार्ज भी है। ऐसे में विधानसभा जैसे संवैधानिक मंच पर गलत जानकारी भेजा जाना विभाग ने गंभीर लापरवाही और जवाबदेही से पलायन माना है। सूत्रों के अनुसार विधानसभा में कृषि से जुड़े एक अहम प्रश्न पर विभाग की ओर से जो उत्तर भेजा गया, वह न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत था, बल्कि जमीनी हकीकत से भी कोसों दूर था। जिसके बाद कृषि विभाग द्वारा उन्हें एपीओ कर दिया गया। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार यह कार्रवाई कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के आदेश पर की गई है। विवादों में रहे हैं जॉइंट डायरेक्टर यह पहला मौका नहीं है जब सतीश शर्मा एपीओ किए गए हों। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी वे लंबे समय तक एपीओ रहे थे। उस समय भी उनके कार्यकाल और कार्यशैली को लेकर सवाल उठते रहे थे। इसके बावजूद उन्हें दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं, लेकिन इस बार विधानसभा प्रकरण ने उनके प्रशासनिक भविष्य पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों से भी रहा है नाता सतीश शर्मा पर पहले भी अक्सर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर कभी खुलकर कार्रवाई नहीं हो सकी, लेकिन विभाग के भीतर उनकी छवि हमेशा विवादों में घिरी रही है। अब विधानसभा प्रकरण के बाद पुराने मामलों पर भी दोबारा नजर डाले जाने की संभावना जताई जा रही है। छापों के बाद फैक्ट्री वालों को किया था आश्वस्त कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा द्वारा प्रदेशभर में बीज फैक्ट्रियों और कृषि इनपुट से जुड़े प्रतिष्ठानों पर किए गए छापों ने पूरे तंत्र की पोल खोल दी थी। इन छापों के दौरान भारी मात्रा में गड़बड़ियां सामने आईं। कई बीज फैक्ट्रियों में किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जा रहा था। इसके अलावा बड़ी मात्रा में खाद का अवैध भंडारण भी पकड़ा गया। लेकिन लंबे समय से चल रहे इस खेल की विभागीय स्तर पर निगरानी नहीं हुई। जबकि जिले में बीज, खाद और कीटनाशकों की मॉनिटरिंग की सीधी जिम्मेदारी जॉइंट डायरेक्टर एग्रीकल्चर की होती है। इसके बावजूद इतनी बड़ी अनियमितताएं सामने आना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। बीज फैक्ट्रियों, खाद गोदामों और किसानों को मिलने वाले लाभ की निगरानी की जिम्मेदारी सीधे उसी पद से जुड़ी थी, जिस पर सतीश शर्मा बैठे थे। यदि समय रहते जांच और सख्ती की जाती तो न तो किसानों के नाम पर फर्जीवाड़ा होता और न ही अवैध भंडारण इतना बढ़ पाता। अब सवाल उठ रहा है कि क्या इन गड़बड़यिों के लिए केवल फैक्ट्री संचालक जिम्मेदार हैं या फिर विभागीय संरक्षण भी इसमें शामिल रहा है। सूत्रों का कहना है कि कृषि मंत्री मीणा के छापों के दौरान सतीश शर्मा ने बीज और खाद फैक्ट्री संचालकों को आश्वस्त किया था कि मंत्री तो जयपुर चले जाएंगे लेकिन कार्रवाई तो हमने ही देखनी है।


