धौलपुर. खेत में लहराती सरसों की फसल। सर्दी से बचाने के लिए फसलों को टाट, पॉलिथीन अथवा भूसे से ढक दें। वायुरोधी टाटियां, हवा आने वाली दिशा की तरफ यानि उत्तर पश्चिम की तरफ बांधे। पाला पढ़ने की संभावना पर खेतों की मेड़ों पर घास-फूस जलाकर पूँआ करें इससे फसल के ऊपर धुएँ की परत जमा हो जाती है। इससे खेत का तापमान बढ़ जाता है एवं पाले का असर नहीं होता है। रात्रि में कृषकों द्वारा सिंचाई करने की स्थिति में अलाव जलाकर शरीर को गर्म रखे जिससे शीतलहर का कम असर हो। जब पाला पढ़ने की संभावना हो तब फसलों में हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए। नमीयुक्त जमीन में काफी देरी तक गर्मी रहती है तथा भूमि का तापक्रम एकदम कम नहीं होता है। जिससे तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरेगा और फसलों को पाले से होने माले नुकसान से बचाया जा सकता है। जिन दिनों पाला पड़ने की सम्भावना हो उन दिनों फसलों पर घुलनशील गंधक ०.२ प्रतिशत (2) ग्राम प्रति लीटर पानी) का व्यापारिक गंधक का तेजाब एम.एल लीटर में घोल बनाकर छिड़काव करें। उन्होंने कहा की पौधों पर घोल की फुहार अच्छी तरह लगे। छिड़काव का असर दो सप्ताह तक रहता है। यदि इस अवधि के बाद भी शीत लहर व पाले की सम्भावना बनी रहे तो छिड़काव को 15-15 दिन के अंतर से दोहराते रहे या थायो यूरिया 500 पी.पी.एम (आधा ग्रान) प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव करते रहे। भास्कर न्यूज | धौलपुर कृषि विभाग ने शीतलहर और बढ़ती ठंड को लेकर किसानों को फसल के बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की है। जिसमें 21 दिसंबर से शीतलहर के और प्रभावी होने तथा आगामी दिनों में न्यूनतम तापमान और कम होने की संभावना जताई है। पाला पड़ने से आलू एवं अन्य सब्जी की फसलों में नुकसान हो सकता है। शीत लहर एवं पाले से सर्दी के मौसम में सभी फसलों को नुकसान होता है। पाले के प्रभाव से पौधों की पत्तियों एवं फूल झुलस कर झड़ जाते हैं तथा अधपके फल सिकुड़ जाते हैं। फलियों एवं बालियों में दाने नहीं बनते हैं व बन रहे दाने सिकुड़ जाते है। ऐसे में किसानों को शीतलहर एवं पाले से फसल की सुरक्षा के उपाय बताए। कहा की पौध शालाओं के पौधों एवं सीमित क्षेत्र बाले उद्यानों/नगदी सब्जी वाली फसलों में भूमि के ताप को कम न होने दें।


