छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास के तहत आवासहीनों के लिए 2.80 लाख पीएम आवास की स्वीकृति दी गई है। इसमें से 2.65 लाख बन चुके हैं। प्रदेश में जरूरत पड़ने पर पीएम आवासों की स्वीकृति बढ़ाई जाएगी। केंद्र की यह कोशिश है कि देश के किसी भी प्रदेश में कोई भी पक्के मकान से अछूता ना रहे। विकसित भारत-2027 के लक्ष्य के साथ देश आगे बढ़ रहा है। इसमें उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में नवोत्थान और समावेशी विकास को बजट में शामिल किया गया है। केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास व शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रविवार को न्यू सर्किट हाउस में मीडिया से यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार लगातार काम कर रही है। उड़ान योजना के तहत जगदलपुर, बिलासपुर और अंबिकापुर से हवाई सेवाएं शुरू की गई हैं। रायपुर के स्वामी विवेकानंद विमानतल को कृषि उड़ान योजना में शामिल किया गया है। इससे कृषि उत्पादों का तेज़ी से परिवहन संभव हो सकेगा। बजट में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। सेमीकंडक्टर मिशन के लिए 10 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए 40 हजार करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इसका सीधा लाभ औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन के रूप में मिलेगा। रेलवे स्टेशनों के पुनर्निर्माण, वेयरहाउसिंग के विस्तार और डेडिकेटेड इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित करने पर काम किया जाएगा। कैपिटल ग्रुप्स बढ़ाने और हाईटेक मशीनरी निर्माण के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे छत्तीसगढ़ विकास की नई राह पर आगे बढ़ेगा। छत्तीसगढ़ में ऊर्जा के क्षेत्र में आरडीएसस (रीवैम्प्ड डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर स्कीम) स्कीम के तहत 414 करोड़ की मंजूरी दी गई है। प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग और सिस्टम मीटरिंग के लिए वित्तीय सहायता और वितरण इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में मदद मिल रही है। इस मौके पर केंद्रीय आवास व शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी, सासंद संतोष पांडेय, बृजमोहन अग्रवाल मौजूद थे। पांच प्रमुख क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित किए जाएंगे
छत्तीसगढ़ से प्राप्त मांग के अनुसार छत्तीसगढ़ के लिए 1 लाख हेल्थ वर्कर और 1.5 लाख केयरगिवर तैयार किए जाएंगे। छत्तीसगढ़ में मेडिकल टूरिज्म और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित किए जाएंगे। 2014 के बाद से छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास को प्राथमिकता दी गई है। अब तक 3,400 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। भारतमाला परियोजना के तहत राज्य में 571 किलोमीटर से अधिक नेशनल हाईवे कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है। इससे राज्य की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।


