सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के बयान को लेकर मध्य प्रदेश के नागदा में विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति के एक एपिसोड में अमिताभ बच्चन ने नागदा को मालवा क्षेत्र का “एक छोटा सा गांव” बताया। उन्होंने यह बात 23 दिसंबर 2025 को प्रसारित ‘फोर्स फॉर गुड स्टोरीज’ सेगमेंट के दौरान कही, जिसमें नागदा में ग्रेसिम इंडस्ट्रीज के सीएसआर कार्यों और पानी की समस्या का जिक्र किया गया था। इस बयान के प्रसारण के बाद नागदा में लोगों की नाराजगी सामने आई। स्थानीय लोगों ने इसे शहर की पहचान को कमतर बताने वाला बयान बताया। विरोध के चलते कोर्ट में परिवाद दायर किया गया, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में शिकायत दी गई और केबीसी की टीम और अमिताभ बच्चन को लीगल नोटिस भी भेजा गया। इस पूरे विवाद के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि ग्रेसिम इंडस्ट्रीज की भूमिका क्या है, जिसकी तारीफ अमिताभ बच्चन ने कार्यक्रम में की थी। दैनिक भास्कर की टीम नागदा पहुंची और उन लोगों से बातचीत की, जिन्होंने इस बयान पर आपत्ति जताई है। साथ ही यह जानने की कोशिश की गई कि उज्जैन जिले के नागदा को गांव कहे जाने से लोगों में इतना आक्रोश क्यों है। जानिए शो के दौरान KBC के होस्ट अमिताभ बच्चन ने क्या कहा…? बिग बी ने कहा था- मालवा इलाके में नागदा छोटा से गांव है शो के दौरान अमिताभ बच्चन ने नागदा को मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र का छोटा सा गांव बताया था। उन्होंने कहा था- गिरते भूजल स्तर और अनिश्चित बारिश के कारण यहां के लोग कई सालों से पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। नागदा के लोगों की इस समस्या को दूर करने के लिए आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी ग्रेसिम इंडस्ट्रीज ने पिछले कुछ वर्षों में कई काम किए। इनमें नए बांध और जलाशय बनाना, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना और नए आरओ सिस्टम स्थापित करना शामिल है। इसका असर यह हुआ कि नागदा में खेतों को पूरे साल पानी मिलने लगा। इन प्रयासों के कारण आज नागदा में करीब 5,000 हेक्टेयर जमीन पर अच्छी फसल हो रही है। लगभग 9,000 परिवारों, यानी करीब 3 लाख लोगों को नियमित पानी और आय का साधन मिला है। अमिताभ बच्चन ने इन कामें के लिए ग्रेसिम की सराहना करते हुए बधाई दी। उन्होंने यह भी बताया था कि, ग्रेसिम जन सेवा ट्रस्ट द्वारा नागदा में एक अस्पताल की स्थापना की गई है, जहां हर साल लगभग 1 लाख 40 हजार मरीजों का इलाज किया जाता है। देश की प्रगति में योगदान के लिए अमिताभ बच्चन ने आदित्य बिड़ला ग्रुप की प्रशंसा की और इसे सही मायने में “फोर्स फॉर गुड” बताया। बिड़ला ग्रुप की सराहना की, पर नागदा को ‘छोटा’ क्यों कहा? यह सवाल कई नागदावासियों के मन में है कि आखिर बिड़ला समूह की तारीफ करते हुए अमिताभ बच्चन ने नागदा को “छोटा” क्यों कह दिया। इसका जवाब कौन बनेगा करोड़पति के कॉन्सेप्ट में छिपा है। केबीसी के हर एपिसोड में एक सकारात्मक पहल को दर्शाया जाता है, जिसे ‘फोर्स फॉर गुड स्टोरीज’ कहा जाता है। इसी सेगमेंट के तहत 23 दिसंबर 2025 को प्रसारित एपिसोड में नागदा में आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी ग्रेसिम इंडस्ट्रीज द्वारा किए जा रहे सीएसआर कार्यों को दिखाया गया था। शो के दौरान अमिताभ बच्चन वही कहते हैं, जो स्क्रिप्ट में लिखा होता है। यह स्क्रिप्ट उन्हें कार्यक्रम के आयोजकों की ओर से दी जाती है। यानी शो में बोले गए शब्द अमिताभ के निजी विचार नहीं थे। हालांकि, अमिताभ चाहते तो स्क्रिप्ट में सुधार या बदलाव का सुझाव दे सकते थे। इसी बात को लेकर नागदावासियों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि नागदा को गांव कहने जैसे शब्दों पर पहले ही आपत्ति जताई जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अमिताभ बच्चन के बयान की शिकायत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में करने वाले व्हिसलब्लोअर अभय चोपड़ा से भास्कर ने बात की। उन्होंने नागदा को छोटा गांव कहने के पीछे साजिश की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि नागदा उज्जैन जिले का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, जिसकी आबादी डेढ़ लाख से अधिक है। यह जल्द जिला बनने वाला है, क्योंकि गजट अधिसूचना जारी हो चुकी है। व्हिसलब्लोअर ने अपनी बात 4 पॉइंट्स में रखी… 1. उद्योगों का अवैध संचालन उन्होंने कहा ये लोग नागदा को जिला बनाने के खिलाफ हैं, क्योंकि इससे उनके अवैध उद्योग प्रभावित होंगे। सेंटर पॉल्यूशन बोर्ड गंभीर प्रदूषण वाले केमिकल उद्योगों को नगरीय क्षेत्रों में लाइसेंस नहीं देता। नागदा के सभी केमिकल उद्योग नगर पालिका क्षेत्र में हैं, इसलिए वे बिना एनओसी के लाइसेंस लेते हैं-पते पर ‘पोस्ट ऑफिस बिड़ला ग्राम, नागदा’ लिखवाते हैं और प्लॉट नंबर गायब रखते हैं। जिला बनने पर प्रशासनिक निगरानी बढ़ेगी, जो उनकी अनियमितताओं को रोक देगी। 2. पेयजल व्यवस्था और अस्पताल चोपड़ा ने कहा कि नागदा चंबल नदी के किनारे बसा शहर है, जहां मध्य प्रदेश सरकार और स्वायत्त संस्थाएं पेयजल आपूर्ति करती हैं, लेकिन इन उद्योगों ने चंबल को प्रदूषित कर दिया है-न इंसानों के लिए और न पशुओं के लिए ये पीने लायक पानी बचा है। 3. पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रहे
चोपड़ा का दावा है कि मुक्तेश्वर महादेव मंदिर के पास एक फैक्ट्री ने करीब एक लाख टन राख का पहाड़ बना दिया है। नदी के किनारे होने से राख का पानी जमीन में रिसकर ग्राउंडवाटर प्रदूषित हो गया। इससे 14 गांवों की खेती बर्बाद हो गई और बच्चे गंभीर बीमारियों (भैंगा, विकलांगता) के साथ जन्म ले रहे हैं। 18 साल की लड़कियां 35 साल की दिखती हैं। नागदा के अन्य क्षेत्रों में ऐसी समस्या नहीं है, इसका एकमात्र कारण फैक्ट्री की राख है। 4. शिकायत और नगर पालिका की मिलीभगत अभय चोपड़ा ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को शिकायती पत्र लिखा कि नगर पालिका भ्रामक जानकारी फैला रही है। उन्होंने कार्रवाई, पेनल्टी और माफी की मांग की है। उनका आरोप है कि नगर पालिका उद्योगों से मिली हुई है। विधानसभा जवाब के अनुसार, उसके पास न इंजीनियर है, न केमिस्ट। पानी की जांच बिना लैब के ही हो रही है। सेटलर टैंक न होने से फिल्टर से पहले कचरा नहीं जमता। लोगों की उम्र तेजी से घट रही है, बुजुर्गों की संख्या बहुत कम है। नगर पालिका पर लग रहे आरोपों और अमिताभ बच्चन के बयान के बारे में पूछताछ करने भास्कर टीम नगरपालिका दफ्तर पहुंची।
हम चंबल किनारे, हमें कोई पानी कैसे पिलाएगा- जल सभापति नागदा नगर पालिका के जल सभापति प्रकाश जैन ने कहा, मुझे लगता है कि अमिताभ जी को जिन लोगों ने ब्रीफ किया, उन्होंने आधी-अधूरी बातें ही बताईं। नागदा अपने आप में एक समृद्ध शहर है। मध्य प्रदेश के जितने भी जिले हैं, उनके आधे जिला मुख्यालयों की जनसंख्या नागदा की शहरी जनसंख्या से भी आधी है। यहां आज करीब 1.5 लाख से ज्यादा आबादी रहती है। अलिराजपुर, झाबुआ, शाजापुर जैसे जिलों में 60-70 हजार की जनसंख्या है, जबकि ये जिला मुख्यालय हैं और नागदा केवल एक तहसील। नागदा की साक्षरता दर भी बहुत से जिला मुख्यालयों से ज्यादा है। अमिताभ जी कह रहे हैं कि बिड़ला जी ने काफी दूर से नागदा में पानी पहुंचाया। मेरा सवाल है कि हम तो चंबल के किनारे बसे हैं, हमारा इलाका पहले से जल समृद्ध है, हमें कोई कैसे पानी पिला सकता है? बिड़ला ब्रदर्स का सरकार से त्रिपक्षीय समझौता हुआ नागदा नगर पालिका के जल सभापति ने कहा कि बिड़ला ब्रदर्स जब यहां आए और उद्योग स्थापित करने लगे, तो उन्हें जमीन और पानी दोनों की जरूरत थी। उस समय उनका सरकार से त्रिपक्षीय समझौता हुआ। सरकार ने डैम बनाने की सशर्त अनुमति दी। शर्त थी कि उद्योग चलाएं, लेकिन नागदा शहर, खाचरोद और रेलवे को पानी पिलाने की जिम्मेदारी आपकी होगी। इसलिए अमिताभ जी को किसी ने अधूरी जानकारी दे दी। नगर पालिका वर्तमान में पूरे नागदा शहर में नल के जरिए पानी सप्लाई कर रही है- वह भी दिन में दो बार। यह डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के अनुसार होता है। अभी 16 एमएलडी (मिलियन लिटर पर डे) का फिल्टर प्लांट है और 6 एमएलडी का एक और प्लांट बनाने की तैयारी चल रही है। इससे साफ है कि हमारे पास भरपूर पानी है। हम समृद्ध शहर हैं। अमिताभ बच्चन का बयान तथ्यात्मक रूप से झूठा और गैर-जिम्मेदाराना है। उनके बयान से नागदा की प्रगति बाधित हुई अमिताभ जी देश की जानी मानी हस्ती हैं। कल्पना कीजिए, जो उद्योगपति यहां निवेश की योजना बना रहे हों, जो मॉल, फैक्ट्री या शैक्षणिक संस्थान खोलने का विचार कर रहे हों, उनके मन में क्या संदेश गया होगा? उनके कर्मचारियों ने भी सोचा होगा कि यदि यह गांव है और मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, तो यहां रहकर जीवन-यापन कैसे होगा? बच्चों की शिक्षा और उपचार की व्यवस्था कैसी होगी? इस तरह के बयान से नागदा की प्रगति प्रभावित हो सकती है। संभव है कि कुछ निवेशकों ने ऐसी बातों को सच मानकर अपने फैसले पर पुनर्विचार किया हो। इसलिए इस मामले में आपत्ति दर्ज कराना जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी सेलिब्रिटी सार्वजनिक मंच पर तथ्य पेश करने से पहले उनका वेरिफिकेशन जरूर करे। यह कदम केवल आपत्ति नहीं, बल्कि नागदा की वास्तविक पहचान और सम्मान की रक्षा का प्रयास है। नागदा गांव नहीं, बल्कि एक विकसित और संभावनाओं से भरा नगर है। मैं अमिताभ बच्चन पर दर्ज किए गए केस के पक्ष में हूं। नागदा को पानी ग्रेसिम नहीं हम दे रहे- सांसद प्रतिनिधी भाजपा नेता और सांसद प्रतिनिधी ओपी गेहलोत का कहना है कि नागदा को गांव बताने वाली बात का पूरी तरह से खंडन करता हूं। नागदा एक छोटा सा गांव नहीं शहर है और इसे तहसील के रूप में जाना जाता है। इस शहर में लगभग 6 से 7 बड़े- बड़े उद्योग हैं। यहां नगर पालिका परिषद, एसडीएम और सीएसपी जैसे अधिकारी कार्यरत हैं, दो पुलिस चौकियां हैं, शासकिय कॉलेज है, जो एक बड़े शहर में ही होते हैं। इसे गांव बोलना शहरवासियों के साथ छलावा है। पूरे देश के लोग यहां आकर रोजगार कर रहे हैं। यहां 36 वार्ड हैं और और वार्ड में करीब 2500 से 3000 लोग रहते हैं। हमारी विधानसभा का नाम ही नागदा-खाचरोद है। कभी किसी गांव के नाम पर विधानसभा का नाम होता है क्या? अमिताभ बच्चन अपनी जानकारी दुरुस्त करें नगरपालिका अध्यक्ष ओपी गेहलोत ने कहा कि पूरे शहर में पानी की आपूर्ति नगर पालिका द्वारा की जाती है। ग्रेसिम प्रबंधन केवल उन दो वार्डों में पानी की व्यवस्था देखता है, जहां उसकी फैक्ट्री के कर्मचारी और मजदूर निवास करते हैं। इसके अलावा शहर के सभी वार्डों में प्रतिदिन दो समय नियमित जलापूर्ति की जाती है। उन्होंने बताया कि शहर में पानी की 12 टंकियां संचालित हैं और रासायनिक प्रक्रिया से शुद्ध किया गया पेयजल नागरिकों को उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में जल आपूर्ति का पूरा श्रेय किसी एक निजी कंपनी या उद्योग समूह को देना तथ्यात्मक रूप से गलत है। गेहलोत ने कहा कि अमिताभ जैसे वरिष्ठ कलाकार को सार्वजनिक मंच से कोई भी जानकारी साझा करने से पहले तथ्यों की पुष्टि कर लेनी चाहिए। नागदा को लेकर दिया गया बयान वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। उन्होंने यह भी कहा कि चंबल मैया की कृपा से शहर में पर्याप्त जल संसाधन उपलब्ध हैं और केंद्र व राज्य सरकार से विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपए प्राप्त हो रहे हैं। ग्रेसिम जिम्मेदारी से बच रही, प्रॉपर्टी निवेशकों में भी संशय अमिताभ के बयान से प्रॉपर्टी और औद्योगिक निवेश को लेकर अनावश्यक संशय की स्थिति बन सकती है। उन्होंने कहा कि नागदा एक विकसित औद्योगिक नगर है और यहां निवेश की अपार संभावनाएं हैं। गलत तथ्यों के आधार पर बनाई गई धारणा से शहर की छवि प्रभावित होती है। जितनी औद्योगिक इकाइयां हैं वे उस क्षेत्र में अपने सीएसआर फंड से विकास कार्य करवाती हैं लेकिन ग्रेसिम ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं किया है। उसके द्वारा स्थापित अस्पताल में ग्रेसिम द्वारा किए गए गंदे पानी से बीमार लोगों का निशुल्क ईलाज होना चाहिए और जान गंवाने वाले लोगों को आर्थिक सहायता देनी चाहिए। अमिताभ बच्चन को कठोर दंड से दंडित किया जाए एडवोकेट एस.के. साहूू का कहना है अमिताभ बच्चन की बात को समझें तो वे कहना चाह रहे हैं कि नागदा में जो कुछ अच्छा हुआ वह ग्रेसिम और बिड़ला ने किया है। इसके बाद आरके ठाकुर और एलएन लोहरवार ने मेरे माध्यम से अमिताभ बच्चन को एक लीगल नोटिस उनके घर पर भेजा। हमारी मांग थी कि नोटिस प्राप्त होते ही नागदा को गांव कहने वाली बात का खंडन करें। फिर मेरे पक्षकार के द्वारा परिवाद कोर्ट में लगी है। 13 मार्च को इसमें बयान होने है। इसी बीच हमारे लीगल नोटिस को उन्होंने रिफ्यूज कर दिया, जिसे भी हमने कोर्ट में लगाया है। जनसेवा ट्रस्ट के अस्पताल में हजारों रुपए वसूलते हैं एडवोकेट साहू ने कहा, मैं ऐसा मानता हूं कि ग्रेसिम में हजारों लोग काम कर रहे हैं लेकिन यहां पानी, स्वास्थ्य सब ग्रेसिम की देन है, ऐसा कहना गलत है। ये जनसेवा ट्रस्ट के नाम से अस्पताल चलाते हैं, उसमें हर चीज का बहुत पैसा लेते हैं। ट्रस्ट से मतलब होता है कि मिनिमम चार्ज में सारा काम हो पाए लेकिन 100 रुपए का तो कार्ड बनता है। नागदा में बहुत बड़ी तादाद फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की है। इनसे अस्पताल में उपचार के नाम पर हजारों रुपए वसूले जा रहे हैं। जो सेवा के लिए बना था अब वो लाभ कमाने के उद्देश्य से काम कर रहा है। बच्चन का बयान नागदा के लिए दुर्भाग्य- व्यापारी संघ किराना व्यापारी संघ के संरक्षक मनोज राठी कहते हैं, मेरा तेल का होलसेल का बिजनेस है। हर साल 50 करोड़ रुपए का टर्नओवर है। नागदा में 29 सालों से व्यापार कर रहा हूं। नागदा कोई आज का शहर नहीं है। यह राजा जन्मेजय की नगरी है, बहुत पुरानी नगरी है। घनश्याम दास जी बिड़ला की फैक्ट्री के बाद यहां बहुत विकास हुआ है। 129 गांवों का व्यापार यहां से चलता है, लेकिन अमिताभ बच्चन का नागदा को छोटा गांव कहना दुर्भाग्यपूर्ण है। चंबल किनारे के गांवों की जमीनी हकीकत…
चंबल नदी कभी इन गांवों की जीवनरेखा थी, लेकिन अब यही पानी अभिशाप बन गया है। डाउनस्ट्रीम में बसे 14 गांव उद्योगों के प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उद्योगों की जरूरतें पूरी करने के बाद चंबल का दूषित पानी उनके गांवों तक पहुंचता है। ग्रामीणों का आरोप है कि नागदा की फैक्ट्रियों का अपशिष्ट चंबल में मिल रहा है। कई बार विरोध के बावजूद सुनवाई नहीं हुई। ईश्वर दास बताते हैं कि पीने का पानी नल-जल से मिल जाता है, लेकिन खेती और पशुओं के लिए बोरिंग का पानी ही इस्तेमाल करना पड़ता है। बोरिंग का पानी हाथ में लो तो तेल जैसा लगता है। जमीन और चंबल का पानी जहर बन गया है। खेतों की मिट्टी सख्त हो चुकी है, फसल पर सफेद केमिकल की परत जम जाती है और उत्पादन 20 प्रतिशत तक सिमट गया है। ये खबर भी पढ़ें… बिग-बी ने एमपी के नागदा को गांव कहा, केस दर्ज कौन बनेगा करोड़पति के 23 दिसंबर 2025 को प्रसारित एपिसोड में मध्यप्रदेश के नागदा को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया है। शो के होस्ट अमिताभ बच्चन द्वारा नागदा को पानी की समस्या से जूझता छोटा सा गांव बताए जाने पर स्थानीय स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। पढ़ें पूरी खबर…


