बूंदी के केशवरायपाटन शुगर मिल को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड पर फिर से शुरू करने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में यह घोषणा की, जिसके बाद बूंदी जिले में बी.एस.एस. सुप्रीमो नरेश मीणा द्वारा किए गए बड़े धरना प्रदर्शन का असर दिखा है। मीणा ने मिल को चालू करवाने के लिए पिछले माह एक बड़ा आंदोलन किया था। 25 साल से बंद पड़ी शुगर मिल मुख्यमंत्री शर्मा ने शुक्रवार को विधानसभा में एप्रोप्रिएशन बिल पर बहस का जवाब देते हुए यह जानकारी दी। करीब 25 साल से बंद पड़ी इस शुगर मिल को फिर से संचालित करने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने तीन-चार अन्य विकास कार्यों की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर नरेश मीणा के समर्थकों ने खुशी जताई है। नरेश मीणा ने इसे किसान हित में एक अच्छी घोषणा बताया। उन्होंने कहा कि इस मिल के चालू होने से हजारों परिवारों को फिर से रोजगार मिलेगा और हजारों किसानों को आर्थिक संबल प्राप्त होगा। इससे लोगों का पलायन भी रुकेगा। मीणा ने यह भी दोहराया कि वह गरीब, मजदूर और अन्य सभी जरूरतमंदों के हकों की लड़ाई के लिए संघर्ष करते रहेंगे। 1965 में हुई स्थापना यह शुगर मिल वर्ष 1965 में स्थापित की गई थी। इससे पांच विधानसभा क्षेत्रों के लगभग एक लाख किसान जुड़े हुए थे, जिनमें से करीब चार हजार किसान शेयरधारक थे। यह मिल वर्ष 2000 के बाद से बंद पड़ी थी। सहकारी शुगर मिल के पुनः संचालित होने से 5,000 से अधिक परिवारों को रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही, क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों में गन्ने की खेती फिर से शुरू की जा सकेगी, जिससे किसानों की आर्थिक उन्नति होगी और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। संचालित किए जाने के लिए हर वर्ष धरना प्रदर्शन किए जाते रहे हैं। वहीं मिल के संचालन से क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल सकेगा। पूर्व में दिल्ली से आई टीम ने भी मिल का निरीक्षण कर सकारात्मक रिपोर्ट दी थी। दो जिलों के किसान जुड़े हुए थे प्रदेश की एकमात्र शुगर मिल रोजगार का एक हब बना हुआ था। जो मजदूर, किसान, वाहन ड्राइवरों के लिए कमाई का साधन था। जब मिल में गन्ना पिराई शुरू होती थी तो हर वर्ग को रोजगार भी मिलता था। मिल से कोटा व बूंदी जिले के सैकड़ों किसान जुड़े हुए थे। किसान गन्ने को नकदी फसल मानते थे और एक बार गन्ना की रोपाई करने के बाद 3ं साल तक व किसानों को लाभ देती थी, लेकिन किसानों की चिंता को दरकिनार कर राज्य सरकार ने मिल क्लो स्थाई रूप से बंद कर दिया। यह भी हुई घोषणाएं मुख्यमंत्री ने गर्मी में लोगों को पेयजल समस्या से निजात दिलाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष के प्रयासों से बूंदी एवं लाखेरी में शहरी जल परियोजना के उन्नयन कार्य के लिए तीन करोड़ रुपए दिए जाने की घोषणा की है। इससे दोनों शहरों में पेयजल लाइन को दुरुस्त करने के साथ ही जिन कॉलोनियों में पाइप लाइन नहीं है, वहां पेयजल संकट से निजात दिलाई जाएगी। सड़कों के लिए 70 करोड़ इसके अलावा मुख्यमंत्री ने कोटा बूंदी जिले की मिसिंग लिकै सड़कों के लिए 70 करोड़ रुपए दिए जाने की घोषणा की है। इससे दोनों मुख्य सड़कों से जोड़ने के कार्य किए किए जा सकेंगे। जिले में जर्जर लिंक सड़कों की मरम्मत के साथ गांवों को को हाईवे हाइवे व कोटा एवं बूंदी जिले में बायीं और दायीं व अन्य नहरों की सफाई एवं डेनेज संबंधी कार्य के लिए 25 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे, जिससे बार बार नहरों के क्षतिग्रस्त होने एवं खेतों में पानी भरने की समस्या से निजात मिलेगी। कापरेन में खेलकूछ की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए दो करोड़ की लागत से स्टेडियम का निर्माण करवाया जाएगा। दुगारी बांध के जीर्णोद्धार के लिए 10 करोड़ पूर्व कृषि मंत्री प्रभु लाल सैनी के प्रयासों से नैनवां ‘ उपखण्ड में दुगारी बांध के जीर्णोद्धार के लिए 10 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने बूंदी जिले में तीन नए उप स्वास्थ्य केन्द्र खोले जाएंगे, साथ ही तीन, उपस्वास्थ्य केन्द्रों को आयुष्मान आरोग्य केन्द्र में एवं तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में क्रमोन्न्त किया जाएगा, जिससे गांवों में सुचारू इलाज की सुविधा मिल सकेगी।


