बगीचों को संवारने और हरियाली बढ़ाने के लिए नगर निगम ने 85 वार्डों में दो साल में 189 काम मंजूर किए, लेकिन 66 काम ही पूरे हो सके। तीन अलग-अलग जोन में 9 काम जारी हैं। सबसे बड़े और 50 करोड़ में तैयार हुए रीजनल पार्क का रखरखाव भी नहीं हो पा रहा है। उसे भी मेंटेनेंस के लिए पीपीपी मॉडल पर देने की तैयारी है। शहर के सभी वार्डों को मिलाकर कुल बगीचों की संख्या 1400 है। इनमें से 700 ऐसे हैं, जिन्हें स्वच्छता सर्वेक्षण में लिया गया है। इसलिए निगम इन 700 बगीचों के रखरखाव पर ही ज्यादा ध्यान देता है। हर जोन में एक-दो फाइलें जनरल के नाम पर बन रही हैं। यानी उसमें किसी विशेष बगीचे का उल्लेख नहीं होता है। मालूम हो, शहर का ग्रीन कवर 14 फीसदी ही है। बड़े निर्माण कामों के चलते बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए हैं। कई वार्डों में काम शुरू ही नहीं हुए हैं। विधानसभा 3 और 4 के कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां बगीचों की संभावना नहीं है, क्योंकि यहां बसाहट ज्यादा है। 50 करोड़ का रीजनल पार्क भी बदहाल जहां बगीचे बेहतर, वहां बना रहे उमंग वाटिका
इसी बीच निगम प्रशासन 1.75 करोड़ की लागत से उमंग वाटिका का प्रोजेक्ट ले आया है। यह प्रोजेक्ट उस वार्ड 81 में लाया गया, जहां बगीचों की स्थिति पहले से बेहतर है। यह वार्ड एमआईसी सदस्य का है, जो जोन 13 में आता है। इसमें चार वार्ड 74, 77, 78 अौर 81 आते हैं। इसके लिए 15 फाइलें मंजूर की गईं। इसमें 8 काम सिर्फ एमआईसी सदस्य के वार्ड में हुए। इन पर निगम करीब 4 करोड़ 9 लाख रुपए खर्च करेगा। आधे काम हो भी चुके हैं। इस जोन में 15 में से 4 बगीचों का काम पूरा हुआ है। यह चारों काम एक ही वार्ड 81 में हुए हैं। वार्ड 74, 77 और 78 में काम पूरे नहीं हुए हैं। उमंग वाटिका स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट है। शहर में 100 से ज्यादा उमंग वाटिकाएं बनना थीं लेकिन बजट की कमी के चलते उमंग वाटिका का प्रोजेक्ट रोक दिया गया। अब स्मार्ट सिटी के इंजीनियर ने प्रोजेक्ट बनाकर निगम को दे दिया। निगम ने सिर्फ वार्ड 81 में ही उमंग वाटिका बनाने का निर्णय ले लिया। जोन 1 में सबसे ज्यादा 21 काम मंजूर हुए (नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार)


