कैसे होगा सपना पूरा:शिक्षा विभाग के लचर रवैये से दम तोड़ रही विवेकानंद स्कॉलरशिप योजना; 10 हजार आवेदन, 500 में से ​सिर्फ 130 छात्रों को मिला लाभ

बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का सपना हर माता-पिता का होता है। बात जब विदेश में पढ़ने की आती है तो यह खुशी दोगुनी हो जाती है। सरकार अपनी योजनाओं के माध्यम से ऐसा अवसर देती है। शिक्षा विभाग की ‘स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस’ योजना के तहत 300 छात्रों को विदेशी यूनिवर्सिटी और 200 छात्रों को भारतीय यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए हर साल स्कॉलरशिप दी जाती है, लेकिन विभाग के लचर रवैये की वजह से बहुत-से छात्रों का सपना टूटता नजर आ रहा है। यह पूरी प्रक्रिया सितंबर इ‌ंटेक के लिए जून में शुरू होकर अगस्त तक पूरी हो जानी चाहिए, लेकिन अब तक 5 लिस्ट जारी हुई है, जिनमें ई-1 कैटेगरी में विदेशी यूनिवर्सिटी के लिए केवल 97 और ई-2 कैटेगरी में सिर्फ 2 छात्रों को ही स्कॉलरशिप मिल पाई है। वहीं भारतीय संस्थानों के लिए 200 में से केवल 31 छात्रों को ही स्कॉलरशिप मिली है। इस स्कॉलरशिप के लिए 10 हजार से ज्यादा छात्रों ने आवेदन किया था। सूची जारी करने में देरी की वजह से फॉरेन यूनिवर्सिटी में एडमिशन की समय सीमा निकट होने के कारण अब ये छात्र एजुकेशन लोन लेकर विदेश जा रहे हैं। वहीं, भारतीय यूनिवर्सिटी में एडमिशन हो चुके हैं और क्लासेज शुरू हो गई हैं, लेकिन कई छात्रों को अभी भी स्कॉलरशिप का इंतजार है। विभागीय देरी से छात्रों की परेशानियां बताते 3 केस विभाग का रवैया: मिलने का समय पर अफसर नदारद शिक्षा संकुल में मौजूद हायर एजुकेशन से संबंधित महकमे के अधिकारी से मिलने का समय सूचना पट्ट पर दोपहर 3 से 4 बजे तक लिखा हुआ है। भास्कर के रिपोर्टर ने 5 दिन संयुक्त निदेशक स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप से मिलने का प्रयास किया, लेकिन वहां ऑफिस बंद मिला। गौरतलब है कि स्कॉलरशिप से जुड़ी जानकारी लेने के लिए पैरेंट्स को अधिकारी से मिलने का समय यही दिया हुआ है, लेकिन किसी से मुलाकात नहीं हो पा रही है। जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि अक्सर इस समय या तो अफसर रहते नहीं हैं और रहते भी हैं तो मिलना नहीं चाहते। इस दौरान जब वहां मौजूद पैरेंट्स से बात की तो उन्होंने नाराजगी जताई। लोगों ने कहा कि लिस्ट जारी करने में देरी के कारण उन्हें मजबूरन लोन लेना पड़ा, जिससे उनके परिवार पर वित्तीय बोझ बढ़ गया है। कई पैरेंट्स ने बताया कि स्कॉलरशिप के लिए पिछले साल आवेदन किया था। पहली और दूसरी फीस देरी से जमा की गई। सरकार जो खर्चा दे रही है, वह भी समय पर नहीं मिल रहा है, जिससे स्टूडेंट परेशान हैं। बच्चों के इनकम टैक्स से जुड़े डॉक्यूमेंट्स अधूरे होने के कारण प्रक्रिया में देरी होती है। पहले जो स्टूडेंट्स स्कॉलरशिप के माध्यम से विदेश जा चुके है, उन्हें समय पर पेमेंट किया जा रहा है। इस वित्तीय साल में अभी तक 90 करोड़ का भुगतान कर चुके हैं। यूनिवर्सिटी इनवॉइस बनाकर हमको भेजती है और फिर हम पेमेंट करते हैं। -ओम प्रकाश बैरवा, आयुक्त, कॉलेज शिक्षा

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