कोंडागांव जिले में केवट/निषाद समाज ने निषाद राज जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई। इस अवसर पर समाज ने अपने कुलपुरुष निषाद राज को स्मरण किया, जिन्होंने प्रभु श्रीराम को गंगा पार कराया था। जयंती के उपलक्ष्य में एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा के दौरान एक नाव में प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को बैठाकर नदी पार कराते हुए एक जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया गया। इस दृश्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम के तहत समाजजनों ने बाजार पारा क्षेत्र में विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद प्रभु श्रीराम और निषाद राज के बीच हुई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण वार्ता का वर्णन किया गया। कथा सुनकर श्रद्धालु हुए भावविभोर वक्ताओं ने बताया कि श्रीराम को नाव पार कराने के बाद जब माता सीता ने निषाद राज को मुद्रिका देनी चाही, तो उन्होंने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया था। निषाद राज ने कहा था, “प्रभु, हम दोनों का काम एक है। आज मैंने आपको नदी पार कराई है, जब मैं आपके पास आऊं, तब आप मुझे भवसागर पार करा देना।” इस प्रसंग के साथ प्रभु श्रीराम के चरण रज पीने की कथा भी सुनाई गई, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कार्यक्रम के अंत में समाज द्वारा प्रसाद वितरण किया गया। इस पूरे आयोजन में सामाजिक एकता, सांस्कृतिक परंपरा और भक्ति भाव का संगम देखने को मिला। निषाद समाज के लोगों ने बताया कि निषाद राज जयंती सेवा, समर्पण और निष्काम भाव से कर्तव्य निभाने की प्रेरणा देती है।


