भास्कर न्यूज| महासमुंद शासकीय प्राथमिक शाला बरभाठा की शाला प्रबंधन विकास समिति ने हाल ही में चेतना विकास मूल्य शिक्षा से संचालित अभिभावक विद्यालय कोकड़ी का एक दिवसीय शैक्षिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यालय के बच्चों में गजब का स्वानुशासन, अभिव्यक्ति की क्षमता और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण देखकर समिति के सदस्य और अभिभावक भाव-विभोर हो गए। भ्रमण के दौरान समिति के अध्यक्ष भास्कर ने बताया कि जहां अन्य सरकारी स्कूल सुबह 10:30 बजे शुरू होते हैं, वहीं कोकड़ी स्कूल प्रातः 9:20 बजे ही प्रारंभ हो जाता है। यहां प्रतिदिन 1 से 2 घंटे की अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जाती हैं। विद्यालय परिसर में स्वच्छ भारत अभियान का जीवंत रूप देखने को मिला, जहां स्वच्छता बच्चों के आचरण में रची-बसी है। कोकड़ी स्कूल के बच्चे न केवल हिंदी, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण जैसे विषयों में निपुण हैं, बल्कि वे जीवन विद्या के माध्यम से अपने चेतना विकास पर भी कार्य कर रहे हैं। स्कूल के सभी छह कमरों में मानवीय चेतना और जीवन विद्या के सूत्रों का सुंदर चित्रण किया गया है, जो अध्ययन के लिए एक अनुकूल भौतिक वातावरण तैयार करता है। बरभाठा स्कूल की प्रधान अध्यापिका शालिनी गायगोरे, तिजमत साहू और मध्यप्रदेश से आईं निधि तांबे ने इस मॉडल की सराहना करते हुए राज्य सरकार से बड़ी मांग की है। उन्होंने अनुरोध किया है कि प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में चेतना विकास मूल्य शिक्षा को अनिवार्य पाठ्यक्रम के रूप में लागू किया जाए। शिक्षक गेंदलाल कोकडिया के माध्यम से राज्य के अन्य शिक्षकों को इसका विधिवत प्रशिक्षण दिया जाए। जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान महासमुंद इसके लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित करे। इस भ्रमण की सफलता को देखते हुए बरभाठा शाला प्रबंधन समिति ने निर्णय लिया है कि भविष्य में वे अपने गांव और स्कूल में भी चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशाला आयोजित करेंगे। टूटते परिवारों को बचाने का समाधान मानवीय मूल्य हैं आज के दौर में जब परिवार टूट रहे हैं और आपसी संबंधों में तनाव बढ़ रहा है, ऐसे में मानवीय मूल्यों की शिक्षा ही एकमात्र समाधान है। शिक्षा का मानवीकरण और लोकव्यापीकरण ही सही आदतों को जन-जन तक पहुंचाने का सबसे सरल माध्यम है।


